एस. जानकी: हर भावना को स्वर देने वाली आवाज़ खामोश

दक्षिण भारतीय सिनेमा पर दशकों तक अपनी असाधारण आवाज से राज करने वाली और पीढ़ियों तक गूंजने वाले गीतों को आवाज देने वाली दिग्गज पार्श्व गायिका एस. जानकी का शनिवार (11 जुलाई, 2026) को मैसूरु में निधन हो गया. वह 88 वर्ष की थीं.

बी. कोलप्पन के मुताबिक, शास्त्रीय रचनाओं, रोमांटिक धुनों, लोक गीतों, हास्य गीतों और भावनाओं से भरे युगल गीतों को समान सहजता से गाने वाली जानकी ने एक ऐसी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिसकी बराबरी बहुत कम लोग कर सकते हैं. संगीत जगत और अपने प्रशंसकों के बीच 'जानकीअम्मा' के नाम से जानी जाने वाली इस गायिका ने हिंदी समेत 18 भाषाओं में करीब 48 हजार गाने गाए और वे बिना किसी प्रयास के एक बच्चे की आवाज में भी गा सकती थीं. उन्होंने कर्नाटक संगीत में प्रशिक्षण लिया था और त्यागराज कृतियों का एक एल्बम भी जारी किया था.

तमिल फिल्म उद्योग में उन्होंने ऐसे समय में अपने लिए एक खास जगह बनाई जब पी. सुशीला और कई अन्य प्रमुख गायिकाएं अपने करियर के शिखर पर थीं. उन्होंने के.वी. महादेवन और एम.एस. विश्वनाथन सहित कई प्रसिद्ध संगीत निर्देशकों के साथ काम किया.  तमिल सिनेमा में उनकी उल्लेखनीय यात्रा को उस्ताद इलैयाराजा के उदय से और गति मिली, जिन्होंने अपनी पहली फिल्म 'अन्नाकिली' (1976) में यादगार गीतों के लिए उन्हें चुना. यह फिल्म तमिल फिल्म संगीत में एक मील का पत्थर मानी जाती है, जिसने 2026 में अपने 50 वर्ष पूरे किए हैं. जानकी ने हाल ही में दिवंगत हुए निर्देशक भारतनीराजा की पहली निर्देशित फिल्म '16 वयथिनिले' के गीत "सेंथूरा पूवे" के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता था.

अविस्मरणीय नगमे

उनकी शुरुआती बेहतरीन रिकॉर्डिंग्स में से एक 'कोंजुम सलंगई' का गीत "सिंगारा वेलाने देवा" था, जिसमें उन्होंने महान नागास्वरम वादक करुकुरिची अरुणाचलम के साथ संगीतमय जुगलबंदी की थी. रागा अभेरी पर आधारित यह गीत आज भी कर्नाटक संगीत और फिल्मी संगीत के सहज मिश्रण का एक मानक बना हुआ है. हालांकि जानकी और अरुणाचलम ने अपने-अपने हिस्सों को अलग-अलग रिकॉर्ड किया था, लेकिन अंतिम संयोजन ने एक जादुई प्रभाव पैदा किया. एक और अविस्मरणीय नगमा 'कुंकुमम' का "चिन्ननचिरिया वन्नापरवई" था, जो राग दरबारी कानाडा पर आधारित था. इस गीत ने उनकी आवाज की गहराई, मिठास और कर्नाटक धुनों की बारीकियों को व्यक्त करने की उनकी क्षमता को दर्शाया.

'सकलकला वल्लवन' में जानकी द्वारा गाए गए चुलबुले गीत "नेथु राथिरी यम्मा" ने अंतरंगता के लिए तरसते एक जोड़े की भावनाओं को पूरी तरह से उजागर किया और यह उस दशक के सबसे लोकप्रिय गीतों में से एक बन गया. वह तेलुगु और मलयालम फिल्म उद्योगों में भी समान रूप से लोकप्रिय थीं.

अक्सर कहा जाता है कि इलैयाराजा जानकी को अपने सबसे अभिव्यंजक गायकों में से एक मानते थे, जो उनके संगीतमय विचारों को सहजता से यादगार प्रस्तुतियों में बदलने में सक्षम थीं. उनके सहयोग ने अनगिनत क्लासिक्स (सर्वकालिक महान गीत) दिए जो आज भी संगीत प्रेमियों द्वारा सराहे जाते हैं.

टी. जानकीरामन के प्रसिद्ध उपन्यास पर आधारित फिल्म 'मोगमुल' में, राग षन्मुखप्रिया पर आधारित गीत "सोलायो वई थिरंधु" की जानकी की प्रस्तुति ने इस रचना को एक चिरस्थायी क्लासिक बना दिया, जो शास्त्रीय कौशल को भावनात्मक गहराई के साथ जोड़ने की उनकी दुर्लभ क्षमता को दर्शाता है.

जानकी की पोती अप्सरा वैद्युला ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट करते हुए लिखा, "उन्होंने अपने परिवार के प्यार के बीच शांति से अंतिम सांस ली.  हालांकि हमारे दिल भारी हैं, लेकिन हम उनके असाधारण जीवन और अपने सदाबहार संगीत के माध्यम से करोड़ों लोगों को दिए गए असीम आनंद के लिए कृतज्ञता से भरे हुए हैं." उन्होंने आगे कहा: "दुनिया के लिए वह एक प्रतिष्ठित आवाज थीं, जिनके गीत अनगिनत यादों का हिस्सा बन गए. हमारे लिए, वह एक प्यारी दादी थीं जिनकी गर्मजोशी, शालीनता, दयालुता और गरिमा हमेशा हमारे साथ रहेगी."

पैतृक गांव का गौरव

आंध्र प्रदेश के बापटला जिले के पल्लापटलु गांव में, जहां जानकी का जन्म हुआ था, निवासियों ने इस प्रतिष्ठित गायिका के साथ अपने जुड़ाव को गर्व और पुरानी यादों के साथ याद किया. 50 वर्षीय सांबशिव राव वोगीबोइना ने द हिंदू को बताया कि जानकी ने अपने परिवार के अन्य जगह जाने से पहले अपना प्रारंभिक बचपन इसी गांव में बिताया था.  उन्होंने बताया कि पल्लापटलु में परिवार का एक बड़ा पुश्तैनी मकान था, जो करीब एक दशक पहले तक जर्जर हालत में खड़ा था. उनके अनुसार, परिवार के पास अब भी गांव में कुछ संपत्ति है.

राव ने बताया कि जानकी ने गांव के एक पुनर्निर्मित मंदिर के प्रतिष्ठापन और पुनरुद्घाटन समारोह में भाग लेने के लिए पल्लापटलु आने की योजना बनाई थी. हालांकि, कोविड-19 महामारी के कारण यह यात्रा संभव नहीं हो सकी.

गुंटूर जिले के तेनाली के रहने वाले तेलुगु फिल्म निर्देशक दिलीप राजा ने कहा कि जानकी तटीय क्षेत्र रेपल्ले के आसपास से आने वाली एकमात्र महान पार्श्व गायिका थीं, जो इस क्षेत्र के लोगों के लिए हमेशा से गर्व का एक अटूट स्रोत रहीं.

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