“मुझे अपने घर में मरने दो”: बांग्लादेश से लौटने के बाद ‘पुशबैक’ की पीड़ा से जूझ रही असम की एक महिला
असम के बरपेटा जिले की 68 वर्षीय अमीना बेगम की कहानी नागरिकता, पहचान और मानवीय त्रासदी का एक जीवंत दस्तावेज है. फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल और गुवाहाटी हाईकोर्ट द्वारा 'विदेशी' घोषित किए जाने, डिटेंशन सेंटर में चार साल काटने और फिर रात के अंधेरे में बंदूक की नोक पर बांग्लादेश सीमा पार धकेले जाने (पुशबैक) के बाद जैसे-तैसे घर लौटी एक बुजुर्ग महिला के खौफ और बेबसी पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

