जाति, उत्तर-दक्षिण और कुपोषण: भारत के बच्चों की सेहत में छिपी सामाजिक खाई
भारत में बाल कुपोषण सिर्फ गरीबी या भोजन की कमी का संकट नहीं है, बल्कि यह देश की गहरी सामाजिक संरचनाओं का भी आईना है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, देश में पाँच साल से कम उम्र के लगभग एक-तिहाई बच्चे ठिगनेपन यानी अवरुद्ध शारीरिक विकास का शिकार हैं. यह स्थिति केवल बच्चों की लंबाई तक सीमित नहीं रहती, बल्कि उनके मानसिक विकास, शिक्षा और भविष्य की आर्थिक संभावनाओं को भी प्रभावित करती है.

