अलीज़ा बानो का कोई अस्तित्व नहीं: कश्मीर सीमा पर दिव्यांग लोग सरकारी सहायता से क्यों हैं बाहर?
जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा के पास उरी, कर्नाह, तंगधार और पुंछ जैसे सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले दिव्यांग नागरिक एक बड़े मानवीय संकट से जूझ रहे हैं. सरकारी रिकॉर्ड में तकनीकी विफलताओं के कारण उंगलियों के बायोमेट्रिक निशान न आने से उरी की 16 वर्षीय अलीज़ा बानो जैसी कई दिव्यांग लड़कियां बिना पहचान पत्र के जीने को मजबूर हैं, जिससे वे दिव्यांग पेंशन और आयुष्मान भारत जैसी कल्याणकारी योजनाओं से पूरी तरह वंचित हैं. लेख में भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान बंकरों में रैंप व व्हीलचेयर जैसी सुगम सुविधाओं के अभाव, मूक-बधिरों के लिए चेतावनी प्रणालियों की विफलता और जम्मू-कश्मीर हैंडीकैप्ड एसोसिएशन के आंकड़ों पर आधारित व्यवस्था की कमियों का विस्तृत विश्लेषण पढ़ें.

