तमिलनाडु: विजय को रोकने के लिए धुर विरोधी ‘डीएमके और एआईएडीएमके’ साथ आएंगे! एआईएडीएमके के प्रस्ताव पर स्टालिन लेंगे फैसला
तमिलनाडु में चूंकि किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हुआ है, लिहाजा वहाँ अजीबोगरीब स्थिति निर्मित हो रही है. इससे ज्यादा आश्चर्यजनक क्या होगा कि विजय को सत्ता में आने से रोकने के लिए परस्पर धुर विरोधी डीएमके और एआईएडीएमके सरकार के गठन पर विचार कर रहे हैं. इसकी प्रमुख वजह यह धारणा है कि विजय यदि एक बार सरकार में आ गए तो फिर दोनों राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के लिए 10-15 वर्षों की फुर्सत हो जाएगी.
राज्यपाल ने विजय को बताया, ‘सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत का समर्थन स्थापित नहीं’
लोक भवन ने गुरुवार (7 मई, 2026) को बताया कि तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने सी. जोसेफ विजय को स्पष्ट कर दिया है कि राज्य विधानसभा में सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत का समर्थन स्थापित नहीं हो पाया है.
‘बहुमत के समर्थन’ के आग्रह के पीछे राष्ट्रपति शासन की छाया
तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय को विधानसभा में बहुमत का समर्थन साबित करना चाहिए, यह आग्रह एक समय की कसौटी पर परखे गए कानूनी सिद्धांत पर आधारित है. यह सिद्धांत कहता है कि राज्यपाल की पहली प्राथमिकता एक स्थिर सरकार का गठन करना है, ताकि राज्य संवैधानिक तंत्र के पूरी तरह विफल होने की स्थिति में न फिसल जाए, जिससे राष्ट्रपति शासन लागू होने की नौबत आए.

