पेड़ न पंखे: भारत के नमक के मैदानों की भीषण गर्मी में ज़िंदा रहने की जद्दोजहद
भारत को हर साल चुनौतीपूर्ण लू (हीटवेव) का सामना करना पड़ता है, लेकिन देश के पश्चिमी रेगिस्तानी नमक के मैदानों जैसी झुलसाने वाली परिस्थितियों का सामना बहुत कम जगहों पर करना पड़ता है. यहाँ श्रमिक लगभग असहनीय तापमान में जीवित रहने के लिए सरल तकनीकों पर निर्भर रहते हैं. गुजरात में लगभग 50,000 श्रमिक आठ महीने इन सुदूर नमक के मैदानों में बिना बिजली या स्वास्थ्य सेवा के बिताते हैं, जहाँ वे पीने और नहाने के पानी के लिए हर 25 दिनों में आने वाले एक टैंकर पर निर्भर रहते हैं.

