आनंद तेलतुम्बड़े | 80 साल बाद भी दलित के ‘छूने’ से जमीन को शुद्ध करने की जरूरत क्यों पड़ती है?
आनंद तेलतुंबडे का विश्लेषण: हल्द्वानी में खड़गे के भाषण के बाद मंच के 'शुद्धिकरण' से उजागर हुई जातिवादी मानसिकता, अनुच्छेद 17 और संवैधानिक बराबरी पर सवाल.
आनंद तेलतुंबडे का विश्लेषण: हल्द्वानी में खड़गे के भाषण के बाद मंच के 'शुद्धिकरण' से उजागर हुई जातिवादी मानसिकता, अनुच्छेद 17 और संवैधानिक बराबरी पर सवाल.