अपूर्वानंद | एसआईआर के विरोधी दलों को बंगाल चुनाव से दूर रहना चाहिए था. अब उन्होंने मतदाताओं के नाम काटे जाने को सामान्य बना दिया है
चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 2026 विधानसभा चुनाव परिणामों से उभरने वाला सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है: सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार का विचार अब पूरी तरह दफ़न हो चुका है. पराकाल प्रभाकर स्पष्ट पीड़ा के साथ लिखते हैं कि यदि पश्चिम बंगाल में 27 लाख वैध मतदाताओं का मताधिकार छीन लिया जाना हमारी सबसे गहरी चिंता नहीं बनती, तो हमें स्वयं को लोकतंत्र कहना बंद कर देना चाहिए.
श्रवण गर्ग | पूरा देश एक हाईजैक हुए विमान की तरह है, और बंदूक कुछ लोगों के हाथ में है
हरकारा डीप डाइव के इस लाइव इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ लोकतंत्र, चुनावी वैधता और विपक्ष की रणनीति पर चर्चा हुई. बातचीत की शुरुआत पराकला प्रभाकर के उस लेख से हुई, जिसमें उन्होंने सवाल उठाया था कि अगर विपक्ष चुनावी प्रक्रिया को “अवैध” और “लूटा हुआ” मानता है, तो फिर उसी प्रक्रिया में लगातार हिस्सा लेने का औचित्य क्या है.

