भोजशाला मामला एक और कारण से महत्वपूर्ण है – यह न्यायाधीशों के परिजनों पर ध्यान केंद्रित करता है
रिष्ठ विधिक पत्रकार वी. वेंकटेशन ने 'द वायर' में भारतीय न्यायपालिका के भीतर पनप रहे 'हितों के टकराव' और कार्यपालिका के साथ बढ़ते अंतर्संबंधों का एक बेहद गंभीर और सैद्धांतिक विश्लेषण किया है. लेख में कमाल मौला मस्जिद-भोजशाला विवाद, पूर्व सीजेआई यू.यू. ललित के बेटे के पैनल नामांकन और जजों की संख्या बढ़ाने वाले नए अध्यादेश के माध्यम से दिखाया गया है कि कैसे कॉलेजियम ने 'सामने के दरवाजे' पर तो पहरा बिठाया, लेकिन कार्यपालिका के लिए 'बगल का दरवाजा' खुला छोड़ दिया। पढ़ें पूरा विश्लेषण.

