कैसे सोशल मीडिया दहेज को जबरन वसूली नहीं, बल्कि हास्य और सामाजिक प्रतिष्ठा के रूप में पेश कर रहा है
भारत में वर्ष 2024 के दौरान दहेज उत्पीड़न के कारण 5,700 से अधिक महिलाओं की मौत दर्ज की गई, यानी हर दिन औसतन 16 मौतें. इसके बावजूद, इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स पर दहेज को “गिफ्ट” या “आशीर्वाद” जैसे शब्दों में पैक करके हास्य और मनोरंजन के विषय के रूप में परोसा जा रहा है. डिजिटल संस्कृति द्वारा एक गंभीर कानूनन अपराध को सामान्य और स्वीकार्य बनाने की इस खतरनाक कोशिश, एल्गोरिद्म की लापरवाही और सामूहिक सामाजिक चेतना के संकट पर पढ़ें यह पूरा विश्लेषण.

