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सुप्रीम कोर्ट ‘तार्किक विसंगति’ टूल से बेखबर रही और 27 लाख लोगों के मताधिकार छीन लिये जाने की अनदेखी

पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने 'द ट्रिब्यून' में प्रकाशित अपने विशेष आलेख में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) प्रक्रिया को वैध ठहराने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कड़ी समीक्षा की है. शेक्सपियर के नाटक 'द मर्चेंट ऑफ वेनिस' का रूपक देते हुए लेखक ने बताया है कि कैसे इस फैसले ने नागरिकता की अंतिम पुष्टि से पहले ही लाखों लोगों से उनका सबसे कीमती वोटिंग अधिकार छीन लिया है. पश्चिम बंगाल के 27 लाख प्रभावित मतदाताओं, 'अपात्र' वर्गीकरण और दस्तावेजी पात्रता के इस पूरे कानूनी व लोकतांत्रिक संकट पर पढ़ें पूरा विश्लेषण.

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