शोभन सक्सेना | अगर अमेरिका अपना हाथ खींच ले, तो इज़राइल आर्थिक और राजनीतिक तौर पर टिक नहीं पाएगा
हरकारा डीप डाइव के इस विस्तृत इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार नितीश त्यागी और ब्राज़ील से जुड़े वरिष्ठ पत्रकार शोभन सक्सेना ने ईरान-इज़राइल युद्ध, डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू के रिश्तों, अमेरिका की वैश्विक रणनीति, पेट्रो-डॉलर राजनीति, भारत की विदेश नीति और पश्चिम एशिया के बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों पर विस्तार से चर्चा की. बातचीत की शुरुआत इस सवाल से होती है कि आखिर क्यों अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू किया गया युद्ध अब उनके नियंत्रण से बाहर जाता दिखाई दे रहा है और क्यों दुनिया भर के बाज़ार, तेल व्यापार और कूटनीतिक समीकरण इससे अस्थिर हो गए हैं.
वैश्विक तेल उत्पादक समूह को बड़ा झटका: यूएई ने ओपेक और ओपेक+ छोड़ा
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने मंगलवार को कहा कि वह ओपेक पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) और ओपेक+ से अलग हो रहा है. तेल निर्यातक समूहों और उनके वास्तविक नेता सऊदी अरब के लिए यह एक बहुत बड़ा झटका है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब ईरान युद्ध के कारण ऐतिहासिक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है और वैश्विक अर्थव्यवस्था अस्थिर है. ओपेक के पुराने सदस्य यूएई का इस तरह अचानक अलग होना समूह के भीतर अव्यवस्था पैदा कर सकता है और उसे कमजोर कर सकता है. यह समूह आमतौर पर भू-राजनीति से लेकर उत्पादन कोटा जैसे कई मुद्दों पर आंतरिक मतभेदों के बावजूद एक एकजुट मोर्चा दिखाने की कोशिश करता रहा है. ओपेक के खाड़ी उत्पादक पहले से ही हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से निर्यात करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं.

