हरकारा रोज़ाना हरकारा रोज़ाना

आकार पटेल | नये भारत का जायजा

वरिष्ठ पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता आकार पटेल के इस विशेष विश्लेषणात्मक लेख के अनुसार, असम और गुजरात जैसे राज्यों में अल्पसंख्यकों के खिलाफ संपत्ति खरीद-बिक्री के नियमों को कड़ा कर 'घेटोकरण' और 'अपार्थेड' (अलगाव) जैसी व्यवस्था को संस्थागत रूप दिया जा रहा है. असम में भाजपा द्वारा दो अलग-अलग धर्मों के बीच ज़मीन सौदों के लिए स्पेशल ब्रांच पुलिस जांच की अनिवार्यता और गुजरात में 'डिस्टर्ब्ड एरियाज़ एक्ट' (अशांत क्षेत्र अधिनियम) के तीन दशकों से जारी विस्तार पर लेखक ने गंभीर सवाल उठाए हैं. लेख में 2009 और 2019 के संशोधनों, कलेक्टर के विवेकाधीन अधिकारों, छह साल की जेल के प्रावधान और अमेरिका के 'फेयर हाउसिंग एक्ट' की तुलना के माध्यम से 'गुजरात मॉडल' की अंतर्निहित प्राथमिकताओं पर विस्तृत विश्लेषण पढ़ें.

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