जनगणना के फील्ड आंकड़े सरकारी दावों से मेल नहीं खा रहे, गणनाकर्मियों को दोबारा सर्वे के निर्देश
भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना (Digital Census) के हाउसलिस्टिंग चरण के दौरान जुटाए जा रहे फील्ड आंकड़ों और सरकारी रिकॉर्ड के बीच बड़ा अंतर सामने आया है. राजस्थान, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में गणनाकर्मियों को खुले में शौच, पेयजल और रसोई ईंधन से जुड़े डेटा की दोबारा समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं. जहां अधिकारी इसे आंकड़ों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया बता रहे हैं, वहीं आंगनवाड़ी और अन्य गणनाकर्मियों ने सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को छिपाने के लिए प्रविष्टियां बदलने के दबाव का आरोप लगाया है. 30 सितंबर तक चलने वाले इस 33-सवालों के डिजिटल सर्वे पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

