भारत में रोज़गार संकट: "विकसित भारत" का सपना और 121 करोड़ बेरोज़गार युवाओं की हक़ीक़त
मशहूर अर्थशास्त्री और योजना आयोग के पूर्व रोजगार शोध संस्थान प्रमुख प्रोफ़ेसर संतोष मेहरोत्रा के विशेष इंटरव्यू पर आधारित इस रिपोर्ट में भारत के गंभीर रोजगार संकट का विस्तृत विश्लेषण किया गया है. प्रो. मेहरोत्रा की नई किताब 'इंडिया आउट ऑफ वर्क' के अनुसार, नोटबंदी और जीएसटी के झटकों के बाद असंगठित क्षेत्र की कमर टूट चुकी है, जिसके चलते जीडीपी के सरकारी दावे वास्तविकता से परे हैं. आईएमएफ द्वारा भारत की जीडीपी पद्धति को सी-ग्रेड पर गिराए जाने, देश के 12 करोड़ 10 लाख 'नीट' (NEET) युवाओं की दुर्दशा, उच्च शिक्षित वर्ग में बढ़ती बेरोजगारी और 8 करोड़ मजदूरों की कृषि क्षेत्र में 'उल्टी विस्थापन' (खेती में वापसी) जैसी कड़वी वास्तविकताओं पर पढ़ें यह विशेष आर्थिक रिपोर्ट

