शुभनीत कौशिक | फुटबॉल और हिन्दी-जगत
शुभनीत कौशिक के लेख पर आधारित विशेष रिपोर्ट: जानिए कैसे फुटबॉल औपनिवेशिक भारत में ब्रिटिश अनुशासन के माध्यम से दाखिल हुआ और धीरे-धीरे भारतीय राष्ट्रवाद, मोहन बागान की ऐतिहासिक जीत और प्रेमचंद व निराला जैसे हिंदी साहित्यकारों के जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गया.

