तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए विजय को आमंत्रित करने में राज्यपाल की देरी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती; दूसरी याचिका दायर
तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर द्वारा 7 मई को जारी उस प्रेस विज्ञप्ति को असंवैधानिक और मनमाना घोषित करने के लिए शनिवार (9 मई, 2026) को सुप्रीम कोर्ट में एक रिट याचिका दायर की गई, जिसमें उन्होंने तमिलगा वेट्टी कझगम (टीवीके) पार्टी के अध्यक्ष सी. जोसेफ विजय के सरकार बनाने के दावे को खारिज कर दिया था.
प्रेम पणिकर: विजय ने द्रविड़ राजनीति की जड़ों को हिला डाला
संपादक, पत्रकार प्रेम पणिकर ने सबस्टैक पर अपने पेज “स्मोक सिग्नल्स” पर तमिलनाडु के चुनाव नतीजों पर अंग्रेजी में लंबा लेख लिखा है. हम यहां हिंदी में लेख के संपादित अंश प्रस्तुत कर रहे हैं: अगस्त 2025 में, जब मैंने अभिनेता विजय के राजनीतिक उभार पर एक लेख लिखा था, तब बहुत से लोगों को लगा था कि यह केवल फिल्मी चकाचौंध से प्रेरित एक अस्थायी लहर है.
तमिलनाडु: विजय को रोकने के लिए धुर विरोधी ‘डीएमके और एआईएडीएमके’ साथ आएंगे! एआईएडीएमके के प्रस्ताव पर स्टालिन लेंगे फैसला
तमिलनाडु में चूंकि किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हुआ है, लिहाजा वहाँ अजीबोगरीब स्थिति निर्मित हो रही है. इससे ज्यादा आश्चर्यजनक क्या होगा कि विजय को सत्ता में आने से रोकने के लिए परस्पर धुर विरोधी डीएमके और एआईएडीएमके सरकार के गठन पर विचार कर रहे हैं. इसकी प्रमुख वजह यह धारणा है कि विजय यदि एक बार सरकार में आ गए तो फिर दोनों राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के लिए 10-15 वर्षों की फुर्सत हो जाएगी.
श्रवण गर्ग | बंगाल चुनाव: ‘अमित शाह का दांव’ और ममता की हार के संकेत
हरकारा डीप डाइव के इस लाइव इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों और उनके व्यापक राजनीतिक असर पर चर्चा हुई. शुरुआती विश्लेषण में यह स्पष्ट किया गया कि यह चुनाव सिर्फ भाजपा बनाम टीएमसी नहीं, बल्कि सीधे तौर पर ‘अमित शाह बनाम ममता बनर्जी’ का मुकाबला बन गया था, जिसमें बढ़त भाजपा के पक्ष में जाती दिख रही है.

