नागरिकता की रेखाओं को फिर से खींच रहा है बंगाल का ‘एसआईआर’
पश्चिम बंगाल में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों का विश्लेषण करती है. रिपोर्ट के अनुसार, मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया अब केवल एक प्रशासनिक अभ्यास नहीं रह गई है, बल्कि यह "कौन भारत का नागरिक होने के योग्य है" इसकी रेखाएं फिर से खींच रही है. मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया (जैसे 'तार्किक विसंगति') इतनी धुंधली है कि लोगों को समझ नहीं आ रहा कि उनके नाम क्यों कटे?
‘इन तर्कों को ट्रिब्यूनल के समक्ष रखें’: सुप्रीम कोर्ट का उन लोगों की याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार, जिनके नाम बंगाल ‘एसआईआर’ के बाद हटाए
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के कई व्यक्तियों द्वारा दायर उन याचिकाओं पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिनमें मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) के बाद उनके नाम हटाए जाने को चुनौती दी गई थी. इन याचिकाकर्ताओं में चुनाव ड्यूटी पर तैनात 65 लोग भी शामिल हैं. अदालत ने उन्हें संबंधित अपीलीय ट्रिब्यूनल के समक्ष राहत पाने का निर्देश दिया.

