राम मंदिर चढ़ावा घोटाले की जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख पंत खुद धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपी
अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा घोटाले के हाई-प्रोफाइल विशेष जांच दल (एसआईटी) का नेतृत्व कर रहे 2004 बैच के आईएएस अधिकारी विजय विश्वास पंत का नाम कथित धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े एक आपराधिक मामले में आरोपी के रूप में सामने आया है. मतलब, जो एसआईटी का प्रमुख है, वह खुद 420 के केस में आरोपी है. उनके खिलाफ यह मामला 2013 से 2015 के दौरान पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक शीर्ष बिजली वितरण अधिकारी के रूप में उनके कार्यकाल के घटनाक्रमों से जुड़ा है.
‘द वायर’ में उमर राशिद की रिपोर्ट के अनुसार, पंत के खिलाफ यह प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) एक लेबर ठेकेदार की शिकायत के बाद दर्ज की गई थी, जिसने विभाग के अधिकारियों पर उसका भुगतान रोकने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर करने का आरोप लगाया था. एफआईआर में पंत का नाम पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम (डब्ल्यूईडीसी) के प्रबंध निदेशक (एमडी) के रूप में दर्ज था — जिस पद पर वह 7 फरवरी 2013 से 3 दिसंबर 2015 तक रहे थे — लेकिन मुख्य आरोप सीधे तौर पर उन्हें निशाना बनाते नहीं दिखते हैं.
पंत वर्तमान में लखनऊ के मंडलायुक्त के रूप में कार्यरत हैं. वह कानपुर के जिलाधिकारी (डीएम) थे जब 2019 में लेबर ठेकेदार शिवकुमार शर्मा की शिकायत पर यह मामला मूल रूप से दर्ज किया गया था.
एसआईटी प्रमुख और इस लंबित धोखाधड़ी मामले के बीच संबंध की रिपोर्ट सबसे पहले हिंदी भाषा के पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने अपने सोशल मीडिया चैनल 'टॉप सीक्रेट' पर दी थी.
उपाध्याय ने 8 जुलाई को ‘एक्स’ पर लिखा, "जो खुद धोखाधड़ी और जालसाजी के लिए जांच के दायरे में है, वह राम मंदिर में गबन, धोखाधड़ी और जालसाजी की जांच कर रहा है! तो राम मंदिर की जांच निष्पक्ष कैसे होगी? यह बिल्कुल वैसी ही होगी जैसा सरकार निर्देश देगी."
इस मामले की खबर पंत के नेतृत्व वाली एसआईटी द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार को 23 जून 2026 को अयोध्या राम मंदिर में दान की कथित चोरी पर अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपने के दस दिन बाद सामने आई है. एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट जुलाई के अंत तक आने की उम्मीद है.
पंत और अन्य से जुड़े इस पुराने मामले की जांच कर रहे मेरठ के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) विश्व ज्योति राय ने बताया कि पुराने मामले में जांच अभी भी जारी है. उन्होंने कहा, "विवेचना प्रचलित है (जांच चल रही है)." अधिकारी ने अपील की कि इस मामले से जुड़ा कोई भी व्यक्ति जिसके पास इसके संबंध में सबूत हों, वह उनसे संपर्क करे.
दिल्ली में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने राम मंदिर दान घोटाले के बारे में बात करते हुए इस मामले का जिक्र किया. उन्होंने पंत का हवाला देते हुए कहा, "भाजपा सरकार ने मंदिर के चढ़ावे की चोरी की जांच करने वाली एसआईटी के प्रमुख के रूप में उसी व्यक्ति को नियुक्त किया जिस पर लूट और गबन का आरोप है."
लखनऊ में संवाददाताओं से बात करते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, "एसआईटी सिर्फ एक पर्दापोश (कवर-अप) है. और मैं सुन रहा हूं कि खुद एसआईटी पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. इसके सदस्यों में से एक (आईपीसी की धारा) 420 (धोखाधड़ी) के तहत एफआईआर का सामना कर रहा है. अब आप ही बताइए, ऐसा व्यक्ति एसआईटी में रहने वाला है."
फरवरी 2019 में, मेरठ के परीक्षितगढ़ पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 465 (जालसाजी) के तहत पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के 14 अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था, जिनमें पंत भी शामिल थे.

