सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार को गिरफ्तारी से ‘पूर्ण’ सुरक्षा दी

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (14 अक्टूबर, 2026) को स्वतंत्र पत्रकार अभिषेक उपाध्याय को रोड रेज के एक मामले के साथ-साथ किसी भी बाद की प्राथमिकी (एफआईआर) में दंडात्मक कार्रवाई से दी गई अंतरिम सुरक्षा को “पूर्ण” (पूरा) कर दिया.

उपाध्याय ने अयोध्या राम मंदिर में दान के कथित गबन और चढ़ावा चोरी पर खोजी ऑनलाइन रिपोर्ट लिखी थीं.

‘द हिंदू’ ब्यूरो के अनुसार, भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' को जारी किए गए उस नोटिस को भी रद्द कर दिया, जिसमें रोड रेज की घटना से लगभग तीन महीने पहले का उपाध्याय का डिजिटल डेटा मांगा गया था.

कोर्ट ने पुलिस के इस तर्क को—कि यह डेटा याचिकाकर्ता का पता लगाने या उसे गिरफ्तार करने के लिए मांगा गया था—नोटिस की सामग्री के साथ "कुछ हद तक विरोधाभासी" पाया.

अदालत ने इस नोटिस को "अत्यधिक और जरूरत से ज्यादा" करार दिया और कहा कि नोटिस के तहत पुलिस को प्राप्त होने वाली किसी भी जानकारी का इस्तेमाल पत्रकार के खिलाफ नहीं किया जाएगा.

अदालत ने कहा, "याचिकाकर्ता (उपाध्याय) की गिरफ्तारी अगले आदेश तक स्थगित रहेगी." अदालत ने 25 अगस्त और 7 सितंबर के अपने अंतरिम आदेशों को पूर्ण कर दिया, जिनके तहत क्रमशः उन्हें गिरफ्तारी से सुरक्षा दी गई थी और जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया था.

अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि रोड रेज की एफआईआर की प्रति याचिकाकर्ता को उपलब्ध करा दी गई है.

पीठ ने आदेश दिया कि उपाध्याय किसी भी आधार पर रोड रेज की एफआईआर को चुनौती दे सकते हैं. शीर्ष अदालत ने मामले की खूबियों पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

अदालत ने उपाध्याय—जिन्होंने रोड रेज के मामले को "फर्जी/तैयार किया गया" बताया था—को मंदिर के बारे में अपनी ऑनलाइन रिपोर्ट का मुकाबला करने की अनुमति दी, साथ ही डिजिटल गोपनीयता और पत्रकारिता की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए दिशा-निर्देश मांगने हेतु एक अलग याचिका दायर करने की स्वतंत्रता भी दी.

शीर्ष अदालत ने पुलिस को यह भी निर्देश दिया कि वे अगले दो दिनों के भीतर पत्रकार का वाहन मुक्त करें.

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