‘संदेश को समझें, संदेशवाहक को न मारें’: ‘कॉकरोच’ आंदोलन पर सोनम वांगचुक की केंद्र से अपील; नेपाल का जिक्र
पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने शनिवार को खुद को एक "मानद कॉकरोच" बताते हुए खुद को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) कहने वाले समूह द्वारा चलाए जा रहे ऑनलाइन "कॉकरोच" आंदोलन का समर्थन किया. इसके साथ ही उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह युवाओं की डिजिटल अभिव्यक्ति को दबाने के बजाय उनके द्वारा उठाई जा रही चिंताओं पर ध्यान दे.
यह ऑनलाइन अभियान, जो लचीलेपन और असहमति के प्रतीक के रूप में व्यंग्य और कॉकरोच की छवि का उपयोग करता है, पिछले कुछ दिनों में काफी चर्चा में आया है. इसके संस्थापकों ने आरोप लगाया है कि उनकी सोशल मीडिया उपस्थिति पर कार्रवाई की जा रही है, जिसमें अकाउंट सस्पेंड होना और हैकिंग की घटनाएं शामिल हैं. इस आंदोलन ने खुद को बेरोजगारी, परीक्षा के पेपर लीक और सार्वजनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द केंद्रित किया है.
‘पीटीआई’ से बात करते हुए वांगचुक ने कहा कि इस अभियान को एक खतरे के बजाय लोकतांत्रिक फीडबैक के रूप में देखा जाना चाहिए. उन्होंने हिंसा के बजाय व्यंग्य के माध्यम से अपनी निराशा व्यक्त करने वाले युवा भारतीयों की रचनात्मकता की सराहना की.
उन्होंने कहा, "हमारे युवाओं की ऐसी रचनात्मक अभिव्यक्तियों से डरने या चिंता करने की कोई बात नहीं है. सरकार को संदेश को समझना चाहिए — संदेशवाहक को नहीं मारना चाहिए." उन्होंने आगे कहा कि आंदोलन द्वारा उठाई गई चिंताएं दबाए जाने के बजाय ध्यान देने योग्य हैं.
यह पूछे जाने पर कि क्या वह औपचारिक रूप से इस आंदोलन में शामिल होंगे, वांगचुक ने हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया कि वे इसकी सदस्यता के पात्र नहीं हैं क्योंकि वे "न तो बेरोजगार हैं और न ही आलसी", लेकिन फिर भी वे खुद को एक "मानद कॉकरोच" मानते हैं.
राजनीतिक कार्टूनों और समाचार पत्रों के कैरिकेचर (व्यंग्यचित्रों) से तुलना करते हुए, वांगचुक ने तर्क दिया कि हास्य और प्रतीकवाद वैध लोकतांत्रिक उपकरण हैं और इन्हें सरकार के प्रति शत्रुता के रूप में देखने के बजाय एक फीडबैक के रूप में देखा जाना चाहिए.
उन्होंने ऑनलाइन असहमति को दबाने के प्रयासों के खिलाफ भी चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अकाउंट बंद करने या डिजिटल अभिव्यक्ति पर अंकुश लगाने से युवाओं में निराशा और गहरी हो सकती है, जिससे उनका गुस्सा अधिक खतरनाक दिशाओं में जा सकता है. नेपाल में हुए राजनीतिक संकट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ऑनलाइन अभिव्यक्ति को प्रतिबंधित करने के अनपेक्षित परिणाम हो सकते हैं.
वांगचुक ने कहा कि परीक्षा के कथित पेपर लीक और जवाबदेही की मांगों जैसे मुद्दों को खारिज नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने ध्यान दिलाया कि ऐसी चिंताएं अन्य देशों में नियमित रूप से मंत्रियों के इस्तीफे का कारण बनती हैं. उन्होंने युवाओं से शांति बनाए रखने का आग्रह किया, साथ ही सरकार से भी अपील की कि वह उन्हें टकराव की ओर "न धकेले".

