लद्दाख के एल-जी ने दिल्ली के आकाओं को प्रभावित करने के लिए ऐसा किया; सोनम वांगचुक का पलटवार
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने लद्दाख के उपराज्यपाल (एल-जी) की उन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने वांगचुक द्वारा की गई "मानद कॉकरोच" की टिप्पणी के बाद उन्हें बार-बार रैलियां और विरोध प्रदर्शन करने के खिलाफ "चेतावनी" दी थी.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, वांगचुक ने कहा कि ऐसा लगता है कि उपराज्यपाल की टिप्पणियाँ "दिल्ली में बैठे आकाओं को प्रभावित करने" के उद्देश्य से की गई थीं.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि उपराज्यपाल लद्दाख में रचनात्मक बातचीत के लिए आपसी विश्वास का माहौल बनाने के प्रति गंभीर हैं, तो "उन्हें शांति और विश्वास बहाली के काम में जुटना चाहिए."
इससे पहले मंगलवार को 'लोक निवास' में सोनम वांगचुक और उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो के साथ बैठक के बाद, एल-जी विनय कुमार सक्सेना ने कहा था कि उन्होंने वांगचुक से 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी- सोशल मीडिया पर वायरल एक व्यंग्यात्मक अभियान) पर अपने बयानों पर पुनर्विचार करने और "एक भ्रामक व भड़काऊ आख्यान (नैरेटिव) बुनने से बचने का आग्रह किया है, जो सार्वजनिक संवाद को खराब करता है."
वांगचुक ने कहा कि उपराज्यपाल (एल-जी) के साथ उनकी बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई थी, और बैठक के बाद उपराज्यपाल द्वारा दिए गए बयान से वे हैरान थे. “हमारी बैठक के दौरान, उन्होंने सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) को लेकर अपनी चिंताएं उठाईं. मैंने उन्हें सूचित किया कि मैं इसे (सीजेपी को) एक रचनात्मक अभिव्यक्ति मानता हूँ और सरकार को इससे असुरक्षित महसूस नहीं करना चाहिए, बल्कि उनकी बात सुननी चाहिए.”
वांगचुक ने आगे कहा कि उपराज्यपाल ने यह समझाया कि “सीजेपी एक विदेशी साजिश है जिसमें भारत के मुकाबले विदेशों से अधिक सदस्य जुड़े हैं. वे लोग पाकिस्तान, बांग्लादेश और अमेरिका से संचालित हैं.”
“उपराज्यपाल को इस बात का अहसास नहीं था कि वे ये बातें उस व्यक्ति से कह रहे थे जिसे लगभग आठ महीने पहले इन्हीं आरोपों के तहत रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) के तहत गिरफ्तार किया गया था. मेरे बारे में भी ऐसी ही कहानियां गढ़ी गई थीं कि मेरे 'तार' पाकिस्तान, चीन या सोरोस फाउंडेशन से जुड़े हैं,” वांगचुक ने कहा.
उन्होंने आगे कहा कि यदि “यह वास्तव में साबित हो जाता है कि सीजेपी के अधिकांश समर्थक विदेशों से हैं” तो वे अपने समर्थन पर पुनर्विचार करेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि इस सोशल मीडिया आंदोलन से जुड़ने वाले सीजेपी के सदस्यों में से 70% भी भारत से हैं, तो, “मैं कहूँगा कि कम से कम रचनात्मक अभिव्यक्ति और विरोध प्रदर्शन के क्षेत्र में तो भारत एक 'विश्वगुरु' है.”

