“वे हमारी जमीन छीन रहे हैं”: काजीरंगा में लग्जरी होटल परियोजनाओं के खिलाफ आदिवासी परिवारों की लड़ाई

‘मकतूब मीडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, असम के काजीरंगा में आदिवासी परिवार अपनी पुश्तैनी जमीन, आजीविका और पर्यावरण को बचाने के लिए प्रस्तावित लग्जरी होटल परियोजनाओं का विरोध कर रहे हैं. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जमीन से बेदखली, पुलिस कार्रवाई, कथित धमकियों और कार्यकर्ता प्रणब डोले की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत ने इस संघर्ष को और तीखा कर दिया है.

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के प्रवेश क्षेत्र में स्थित कोहारा गांव की गीता गोवाला और उनकी बहन मिनाली गोवाला उन परिवारों में शामिल हैं जो अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं. गीता का कहना है कि उनके परिवार और समुदाय पीढ़ियों से इस जमीन पर खेती करते आए हैं. जिस जमीन को स्थानीय लोग ‘इंग्ले पाथर’ कहते हैं, वह हाथी गलियारे और काजीरंगा के आसपास के वन क्षेत्र से जुड़ी हुई है.

2023 में असम सरकार ने काजीरंगा के पास एक पांच सितारा होटल विकसित करने के लिए एटी़डीसी, हयात समूह और सराफ समूह/जूनिपर होटल्स के बीच समझौता किया था. प्रस्तावित परियोजना की लागत करीब 100 करोड़ रुपये और क्षमता 100 से 120 कमरों की बताई गई थी. दिसंबर 2024 में आरटीआई के जवाब और अन्य दस्तावेजों के आधार पर ‘द रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ की रिपोर्ट में दावा किया गया कि गोलाघाट जिला प्रशासन ने करीब 30 बीघा जमीन एटीडीसी को आवंटित की थी, जिसे बाद में सराफ समूह को दिया गया.

हालांकि, हयात ने बिजनेस एंड ह्यूमन राइट्स रिसोर्स सेंटर को दिए जवाब में कहा कि उसने इंग्ले पाथर/हाथीखुली के पास प्रस्तावित होटल को ब्रांड या संचालित करने के लिए कोई समझौता नहीं किया है. ‘मकतूब’ ने भी हयात से प्रतिक्रिया मांगी, लेकिन रिपोर्ट प्रकाशित होने तक कोई जवाब नहीं मिला.

स्थानीय परिवारों का कहना है कि उनके पास जमीन से जुड़े पुराने दस्तावेज और 1960 के दशक से भूमि राजस्व भुगतान की रसीदें हैं. गीता के अनुसार, इस साल उन्हें अपनी जमीन पर खेती करने से रोक दिया गया और वहां पुलिस की मौजूदगी में प्रवेश निषेध कर दिया गया. उनके द्वारा बनाया गया एक मकान भी कथित तौर पर गिरा दिया गया. करीब 45 परिवारों के जमीन खोने का दावा किया गया है. 20 आदिवासी परिवारों ने जून में गुवाहाटी हाई कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद अदालत ने बेदखली के मामले पर संज्ञान लिया.

इसी बीच, आदिवासी कार्यकर्ता प्रणब डोले की गिरफ्तारी ने भी विवाद को बढ़ाया. 12 जुलाई को गिरफ्तार किए गए डोले को जमानत मिलने के अगले ही दिन एनएसए के तहत हिरासत में ले लिया गया. उनके वकील ने आरोप लगाया कि एनएसए का इस्तेमाल जमानत को निष्प्रभावी करने के लिए किया गया. राज्य सरकार ने उन पर संदिग्ध विदेशी लेन-देन और एफसीआरए के उल्लंघन का आरोप लगाया है. उनके वकील के अनुसार, डोले के खिलाफ 13 मामलों में से 11 में वे बरी या आरोपमुक्त हो चुके हैं.

काजीरंगा में विरोध केवल एक होटल परियोजना तक सीमित नहीं है. रिपोर्ट के अनुसार, टाटा के चाय बागान के एक हिस्से को भी लग्जरी ताज होटल में बदलने की योजना है. इससे करीब आठ हेक्टेयर चाय बागान प्रभावित होने और कई श्रमिकों के रोजगार पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है.

स्थानीय आदिवासी कार्यकर्ता पर्यावरण और आजीविका के बीच संतुलन को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं. असम सरकार ने काजीरंगा के आसपास 10 किलोमीटर के डिफॉल्ट पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्र की जगह एक से तीन किलोमीटर का स्थान-विशिष्ट बफर क्षेत्र प्रस्तावित किया है. स्थानीय कार्यकर्ताओं का कहना है कि काजीरंगा में इंसानों और वन्यजीवों का सह-अस्तित्व सदियों पुराना है और अनियंत्रित पर्यटन परियोजनाएं इस संतुलन को नुकसान पहुंचा सकती हैं.

गीता गोवाला और उनके साथियों के लिए यह लड़ाई अब केवल जमीन की नहीं, बल्कि अपनी आजीविका, संस्कृति और काजीरंगा के भविष्य को बचाने की लड़ाई बन चुकी है.

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