ज्ञानेश कुमार की खातिर... दिल्ली में लॉकडाउन, कई बंदिशें; सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा-“मक्खी मारने के लिए हथौड़ा चला रहे हैं” 

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की खातिर भारत सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को एक तरह से छावनी बना दिया है. तमाम बंदिशें लगाई हैं. मेट्रो और अन्य ट्रेन स्टेशन बंद करने के लिए कहा गया है. जंतर-मंतर और कर्तव्य पथ के 4 किमी के दायरे में इंटरनेट सेवाओं को सस्पेंड कर दिया गया है. इतने प्रतिबंध लगाए हैं कि देश की सबसे बड़ी अदालत को सरकार को फटकारते हुए कहना पड़ा है- “आप मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं कर सकते.” केंद्रीय गृह मंत्रालय सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर काम करने और प्रदर्शनकारियों को राष्ट्रीय राजधानी की ओर बढ़ने से रोकने के लिए निवारक (अग्रिम) कदम उठाने को कहा है.  

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के नेताओं द्वारा शनिवार 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन का आह्वान किए जाने और देश के शीर्ष चुनाव अधिकारी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बाद, भारत की राजधानी दिल्ली में पुलिस ने कड़ी नाकेबंदी कर दी है. यह विवाद मतदाता सूची के एक विवादास्पद संशोधन को लेकर है, जिसके तहत 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं, जिससे उन्हें सार्वभौमिक मताधिकार से वंचित कर दिया गया है.

‘द इंडिपेंडेंट’ में नमिता सिंह की रिपोर्ट है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) ने युवा समूहों, विपक्षी दलों और उनके छात्र संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शनों की एक श्रृंखला को जन्म दिया है, जो भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके, जिनके पिछले विरोध प्रदर्शन के कारण शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा था, ने कहा: "मैं कल दिल्ली पहुंच रहा हूँ और चाहे जो हो जाए, जंतर-मंतर की ओर मार्च करूँगा." उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए अपने संदेश में आगे कहा, "इस देश का युवा अब आपसे नहीं डरता."

इस बीच, मोदी की हिंदू-राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी के तहत प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए व्यापक बल तैनाती के साथ मेट्रो और ट्रेन स्टेशनों को बंद करने सहित कई निर्देश जारी किए हैं.

दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से राष्ट्रीय राजधानी के 57 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने का अनुरोध दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन से किया है.

रॉयटर्स के अनुसार, अधिकारियों ने कहा कि पुलिस ने "उपद्रवी" भीड़ की संभावना का हवाला देते हुए कम मेट्रो ट्रेन सेवाओं और कुछ निकास द्वारों को बंद करने की मांग की थी.

रेल मंत्रालय ने कहा कि शनिवार को दिल्ली और निज़ामुद्दीन रेलवे स्टेशनों के लिए कुछ लंबी दूरी की ट्रेनों को "सड़क यातायात में अत्यधिक भीड़ की संभावना को देखते हुए" रद्द कर दिया गया है.

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को प्रवेश द्वारों को बंद करने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन प्रतिबंधों से हजारों यात्रियों पर असर पड़ेगा.  अदालत ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में स्थित नोएडा और गुड़गांव जैसे उपग्रह शहरों की यात्रा करने वाले छात्रों, कर्मचारियों और वरिष्ठ नागरिकों की ओर इशारा किया.

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा, "हर किसी के पास कार नहीं होती... आप सब कुछ ठप करके लोगों को बिना किसी परिवहन सुविधा के नहीं छोड़ सकते."   ज्यादा सख्ती पर सरकार को फटकार लगाते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा- आपको कुछ चीजों को रोकना ही होगा. उन्हें रोकने के लिए सिर्फ उतनी ही कार्रवाई करें जितनी जरूरी हो. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि “आप मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल करें.” 

अदालत ने सरकार से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली मेट्रो और राजधानी के लिए ट्रेन सेवाएं पूरी तरह से निलंबित न हों.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हम यह स्पष्ट करते हैं कि मेट्रो ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह से रोक नहीं होगी," और यह भी जोड़ा कि असुविधा को कम करने के लिए सेवाएं विनियमित तरीके से जारी रहनी चाहिए. 

राजधानी में पुलिस ने सीजेपी को शनिवार के विरोध प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया और कहा कि यदि प्रदर्शनकारियों ने नियमों का उल्लंघन किया तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है. 

पुलिस ने लोगों को "अनावश्यक विरोध प्रदर्शन" में भाग न लेने के प्रति आगाह भी किया, और दिल्ली की एक मस्जिद सहित कई स्थानों पर इसकी घोषणा की. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक कथित वीडियो में एक पुलिस कर्मी को यह कहते सुना जा सकता है, "कृपया अपने बच्चों और परिवार के सदस्यों को जागरूक करें कि वे किसी भी अनावश्यक विरोध प्रदर्शन में भाग न लें."

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कई अन्य सार्वजनिक चौकों और बाज़ारों का उपयोग "जानकारी प्रसारित करने" के लिए किया गया है, जिसमें लोगों से "गैर-कानूनी" विरोध में शामिल न होने का आग्रह किया गया है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पुलिस ने अनुमति न देने के कारणों में आवेदन देर से जमा करने और पिछले प्रदर्शन के दौरान नियमों के उल्लंघन का हवाला दिया.

अधिकारियों ने हजारों पुलिस और अर्धसैनिक बलों को तैनात किया है, जिनमें जम्मू और कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्र भी शामिल हैं.

मोदी के बाद दूसरे स्थान पर मौजूद अमित शाह के तहत गृह मंत्रालय के निर्देशों पर पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की लगभग 7,000 कर्मियों वाली कम से कम 70 कंपनियां दिल्ली भेजी जा रही हैं.

कई प्रतिबंधों को लेकर केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए दीपके ने कहा: "अगर युवाओं से डर लगता है तो पूरा देश बंद कर दो." सीजेपी ने कहा कि कई राज्यों में पुलिस उसके हजारों समर्थकों को शनिवार के विरोध प्रदर्शन के लिए जाते समय हिरासत में ले रही है.

स्थानीय पुलिस ने मध्य प्रदेश में गोवा एक्सप्रेस में सवार दर्जनों छात्रों को भी हिरासत में लिया है, जो मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के लिए दिल्ली यात्रा कर रहे थे.

2024 में कम से कम 96 करोड़ पात्र मतदाताओं वाले दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र ने पूर्वी राज्य बिहार में चुनावों से पहले पिछले साल सत्यापन का काम शुरू किया था और अब अधिकांश राज्यों को इसमें कवर कर लिया है.

विपक्षी दलों और आलोचकों का कहना है कि अंतिम संशोधन के लगभग दो दशक बाद हुआ यह नया संशोधन भाजपा के पक्ष में बड़े पैमाने पर मताधिकार छीनने जैसा है. वे चाहते हैं कि इस प्रक्रिया को रद्द किया जाए और पुरानी मतदाता सूची बहाल की जाए.

राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी कांग्रेस ने मोदी और भाजपा के विरोधी एक दर्जन से अधिक दलों के सहयोगियों की बैठक बुलाई और विपक्षी दलों के नुमाइंदे और सांसद शुक्रवार शाम (9 अक्टूबर, 2026) को संवैधानिक प्रमुख, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करने पैदल मार्च करते हुए राष्ट्रपति भवन पहुंचे, जहां मुर्मू को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा गया. इसमें चार मांगे की गई हैं- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा और 2023 के उस कानून को निरस्त करना जो मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को आजीवन छूट (इम्युनिटी) प्रदान करता है. एसआईआर का तत्काल निलंबन और मतदाता सूची से "गैर-कानूनी तरीके से हटाए गए" सभी 13.30 करोड़ मतदाताओं का नाम तुरंत बहाल करना. सभी चुनावों के लिए मतपत्रों (पेपर बैलेट) की ओर वापसी और पिछले दो वर्षों के उन सभी विधानसभा चुनावों को रद्द करना जिनमें 'वोट चोरी' के अकाट्य/ठोस सबूत पेश किए गए हैं.

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