डिजिटल अरेस्ट घोटाला: व्हाट्सएप ने 9,400 खाते बंद किए, सुप्रीम कोर्ट को बताया — पूरे नेटवर्क को किया ध्वस्त
सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल दस्तावेज़ों से खुलासा हुआ है कि व्हाट्सप ने गृह मंत्रालय को बताया कि उसने स्वतंत्र जांच के बाद ‘डिजिटल अरेस्ट’ और ‘कानून प्रवर्तन के प्रतिरूपण’ से जुड़े 9,400 खाते बंद किए. कंपनी ने कहा कि उसने महज एक-एक खाता बंद करने के बजाय पूरे ठग नेटवर्क को ध्वस्त करने पर ध्यान केंद्रित किया, जो मुख्यतः कंबोडिया में सक्रिय था.
यह संचार भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की ओर से गृह मंत्रालय द्वारा दाखिल स्टेटस रिपोर्ट में संलग्न था. अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी इस मामले में मंत्रालय की ओर से पेश हो रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार मार्च में विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) की अध्यक्षता में बुलाई गई बैठक में एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया, रिलायंस जियो और बीएसएनएल के साथ व्हाट्सऐप को भी आमंत्रित किया गया था.
“द हिंदू” के अनुसार, व्हाट्सएप ने सिम बाइंडिंग पर काम जारी रहने की बात कही और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश) नियम 2021 का पालन करने की प्रतिबद्धता जताई. इन नियमों में ‘कृत्रिम रूप से निर्मित सूचना’ (एसजीआई) की पहचान और लेबलिंग से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं जो डिजिटल अरेस्ट में उपयोग की जाने वाली वीडियो कॉल्स में इस्तेमाल होती है. कंपनी ने एआई और मशीन लर्निंग आधारित प्रणाली को और मजबूत करने, तथा हटाए गए खातों का डेटा न्यूनतम 180 दिनों तक संरक्षित रखने पर भी सहमति जताई.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने डिजिटल अरेस्ट घोटालों को सबसे “परेशान करने वाला” और खतरनाक साइबर अपराध बताया है. उन्होंने कहा कि यह महज आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि “मानवीय गरिमा के विरुद्ध अपराध” है. न्यायालय ने जनवरी में स्वतः संज्ञान लिया था, जब पाया कि पुलिस और न्यायिक अधिकारियों के वेश में ठग लोगों को मनोवैज्ञानिक रूप से प्रताड़ित कर बड़ी रकम ऐंठ रहे हैं. इन मामलों में एक 78 वर्षीय महिला वकील का मामला भी शामिल है. गृह मंत्रालय के पास डिजिटल अरेस्ट घोटालों से जुड़ी 2.41 लाख से अधिक शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें लगभग 30,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है.

