ईरान संघर्ष: नए शीत युद्ध की आहट, होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी

‘एक्सिओस’ की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के साथ अमेरिकी टकराव अब शीत युद्ध जैसी स्थिति में पहुंच गया है — वित्तीय प्रतिबंध, समुद्री नाकाबंदी और बातचीत के प्रयासों के बीच. कई अमेरिकी अधिकारियों ने एक्सिस को बताया कि उन्हें डर है कि अमेरिका एक ऐसे “जमे हुए संघर्ष” में फंस सकता है जहां न युद्ध हो न कोई समझौता.

राष्ट्रपति ट्रंप नए सैन्य हमले और “अधिकतम दबाव” वाली आर्थिक पाबंदियों के बीच झूल रहे हैं. उनके एक सलाहकार ने एक्सिस को बताया, “वह निराश हैं लेकिन यथार्थवादी. वह बल प्रयोग नहीं चाहते, पर पीछे भी नहीं हटेंगे.” ट्रंप ने एक सलाहकार से कहा, “ईरान के नेता सिर्फ बम की भाषा समझते हैं.”

विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने फॉक्स न्यूज़ पर कहा कि ईरान पर प्रतिबंधों का स्तर “असाधारण” है और वह चाहते हैं कि शेष दुनिया भी इस अभियान में शामिल हो. ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद कर फारस की खाड़ी से तेल ले जाने वाले टैंकरों से टोल वसूलना शुरू किया था, जो वैश्विक कच्चे तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत है. ट्रंप ने इसके जवाब में नाकाबंदी लगाई. ट्रेज़री सचिव स्कॉट बेसेंट ने चीन में ईरानी तेल की प्रोसेसिंग करने वाली “टीपॉट” रिफाइनरियों समेत वित्तीय संस्थाओं पर प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाया है.

ईरान ने होर्मुज़ खोलने के बदले अमेरिकी नाकाबंदी हटाने का प्रस्ताव रखा, लेकिन ट्रंप इसे स्वीकार करने के इच्छुक नहीं दिखते क्योंकि इससे परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत टल जाती. सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक्स पर लिखकर ट्रंप को ईरान के प्रस्ताव को ठुकराने की सलाह दी. नवंबर के मध्यावधि चुनावों को देखते हुए एक सूत्र ने कहा, “जमा हुआ संघर्ष ट्रंप के लिए राजनीतिक और आर्थिक दोनों रूप से सबसे बुरा होगा.”

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