श्रवण गर्ग | सरकार पारदर्शी और जवाबदेह नहीं है
‘हरकारा डीप डाइव’ के लाइव एपिसोड में निधीश त्यागी ने वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ चुनाव आयोग, इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट और हालिया घटनाक्रम पर चर्चा की. बातचीत में गर्ग ने कहा कि घटनाक्रम को समझने के लिए राहुल गांधी के लंबे अभियान और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को अलग-अलग देखना जरूरी है. उनके मुताबिक, रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग ने तेजी से प्रतिक्रिया दी, जबकि राहुल गांधी 2023 से मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठा रहे थे.
गर्ग ने रिपोर्टर रतिका चोपड़ा की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सवाल किया कि अखबार ने इतनी संवेदनशील रिपोर्ट प्रकाशित करने का जोखिम क्यों उठाया. उन्होंने इस घटनाक्रम की तुलना वाटरगेट प्रकरण से करने पर आपत्ति जताई, लेकिन कहा कि रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया ने कई पुराने सवाल फिर सामने ला दिए हैं.
चर्चा में गर्ग ने चुनाव आयोग की बैठक और उसके बाद लिए गए फैसलों का उल्लेख किया. उनके अनुसार, आयोग ने कुछ प्रक्रियाओं में बदलाव, आईटी मॉड्यूल की समीक्षा, जिला और निर्वाचन अधिकारियों को अधिक पहुंच देने, गोवा के 97 मतदाताओं के नाम बहाल करने तथा नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए विशेष अभियान चलाने जैसे कदमों की जानकारी दी. गर्ग ने सवाल उठाया कि यदि ये व्यवस्थाएं पहले से जरूरी थीं, तो इन्हें पहले क्यों नहीं अपनाया गया. उन्होंने पश्चिम बंगाल के मतदाताओं से जुड़े मामलों, फॉर्म-6 में मांगी गई जानकारी और ईसीआई-नेट के केंद्रीकृत नियंत्रण पर भी सवाल उठाए.
बातचीत का एक हिस्सा चुनाव आयोग के अधिकारियों की भूमिका और कथित असहमति से जुड़ी रिपोर्ट पर केंद्रित रहा. गर्ग ने आयोग की सफाई और मीडिया में सामने आई जानकारी के बीच उठ रहे सवालों को रेखांकित किया. हालांकि, उन्होंने संभावित राजनीतिक कारणों और सत्ता के भीतर बदलावों से जुड़े अपने विचारों को अटकलें और काल्पनिक परिदृश्य भी बताया.
उन्होंने विदेशी शक्तियों की नाराजगी, नेतृत्व परिवर्तन, उत्तर प्रदेश सहित 2027 के विधानसभा चुनावों और विपक्षी एकता को लेकर कई सवाल उठाए. इन संभावनाओं को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि मौजूदा घटनाक्रम को समझने के लिए उठाए गए प्रश्नों के रूप में प्रस्तुत किया.
अंत में गर्ग ने देश और प्रधानमंत्री से जुड़े संकटों को व्यापक राजनीतिक संदर्भ में देखने की बात कही. निधीश त्यागी ने बातचीत समेटते हुए कहा कि पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी ही ऐसे सवालों और कल्पनाओं को जन्म देती है. उन्होंने घटनाक्रम पर नजर बनाए रखने और तथ्यों को शोर से अलग करके देखने की जरूरत पर जोर दिया.
पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं.

