अजित साही | मोदी जी की रवानगी अब तय है

'हरकारा डीप डाइव' में निधीश त्यागी ने वाशिंगटन डीसी से वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अजित साही के साथ चुनाव आयोग में कथित असहमति, राहुल गांधी के आरोपों, जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन और केंद्र सरकार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की.

बातचीत में साही ने इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट को महत्वपूर्ण बताया, जिसमें चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर लिखित आपत्तियां दर्ज कराने की बात कही गई थी. साही के मुताबिक, चुनाव आयोग के भीतर सामने आई असहमति और मतदाता सूची से जुड़े सवाल केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), नए मतदाताओं के नाम जोड़ने और मतदाता सूची से नाम हटाने जैसे मामलों में चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का जवाब नहीं दिया गया और कई महीनों तक बैठकें भी नहीं हुईं.

राहुल गांधी द्वारा चुनावी प्रक्रिया पर लगाए गए आरोपों को भी साही ने इसी व्यापक विवाद के संदर्भ में देखा. उनके विचार में, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची को लेकर उठे सवाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया में नागरिकों के भरोसे से जुड़े हैं. बातचीत में रखे गए आरोपों और दावों को संबंधित वक्ताओं के विचार के रूप में देखा जाना चाहिए; उन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता.

चर्चा का एक बड़ा हिस्सा केंद्र सरकार की राजनीतिक स्थिति और उसके भीतर संभावित असहमति पर केंद्रित रहा. साही ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल में फेरबदल करना चाहते हैं, लेकिन उन्हें राजनीतिक और संगठनात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने इसे सरकार की निर्णय क्षमता में कथित ठहराव का संकेत बताया. अर्थव्यवस्था, महंगाई, उद्योगों और आम लोगों की परेशानियों का उल्लेख करते हुए साही ने कहा कि जनता में असंतोष बढ़ रहा है.

निधीश त्यागी ने सवाल उठाया कि क्या चुनाव आयोग से जुड़े विवाद और विरोध प्रदर्शनों के बीच नौकरशाही, न्यायपालिका तथा सत्तारूढ़ दल के भीतर भी बदलाव के संकेत दिखाई दे रहे हैं. जवाब में साही ने कहा कि संस्थाओं की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रिया पर नागरिकों का भरोसा लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि राजनीतिक ध्रुवीकरण और भय का माहौल अंततः सत्ता के लिए भी चुनौती बन सकता है.

बातचीत के अंतिम हिस्से में युवाओं की राजनीतिक भागीदारी, जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन और नई राजनीतिक शक्तियों की संभावनाओं पर चर्चा हुई. साही ने मौजूदा व्यवस्था को रीसेट करने की जरूरत बताई और भाजपा, आरएसएस तथा हिंदुत्व की राजनीति के भविष्य को लेकर अपने अनुमान साझा किए. उनके ये विचार राजनीतिक विश्लेषण और भविष्य संबंधी आकलन थे, स्थापित तथ्य नहीं.

पूरी बातचीत हरकारा रोज़ाना के यूट्यूब चैनल पर सुन सकते हैं.

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