मोदी और बीजेपी ने कैसे-कैसे आरोप लगाए थे, लेकिन कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व पीएम मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से मिली क्लीन चिट
विशेष अदालत द्वारा कोयला ब्लॉक आवंटन मामलों के सिलसिले में मनमोहन सिंह को समन भेजे जाने के एक दशक से भी अधिक समय बाद, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया, जिसमें दिवंगत प्रधानमंत्री को इस मामले में बेदाग (क्लीन चिट) करार दिया गया है. याद हो, 2014 के लोकसभा चुनावों के पहले भाजपा ने कोयला ब्लॉक आवंटन को लेकर सिंह पर बार-बार निशाना साधा था और इसे “कोलगेट घोटाला” नाम दिया था. नरेंद्र मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने मनमोहन सिंह पर सरकारी खजाने को हुए भारी नुकसान के लिए नैतिक, राजनीतिक और प्रत्यक्ष जिम्मेदारी का आरोप लगाया था और चुनाव अभियानों व संसदीय बहसों के दौरान बार-बार इस कथित घोटाले का जिक्र किया था. लिहाजा कांग्रेस ने कहा है कि मोदी को देश से माफी मांगना चाहिए.
अनंतकृष्णन जी. की रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने कहा कि निचली अदालत के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करने का कोई औचित्य नहीं था और उसने कार्यवाही को बंद कर दिया. सिंह का निधन 26 दिसंबर, 2024 को हुआ था.
अदालत ने अपने आदेश में कहा, "आक्षेपित (चुनौती दिए गए) आदेश के माध्यम से, विद्वान विशेष न्यायाधीश ने अपीलकर्ता डॉ. मनमोहन सिंह सहित छह व्यक्तियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत संज्ञान लिया था. सीबीआई ने जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिससे अपीलकर्ता को क्लीन चिट मिल गई थी. इसके बावजूद, विद्वान न्यायाधीश ने क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर दिया और संज्ञान लिया."
सीबीआई ने अगस्त और अक्टूबर 2014 में निचली अदालत के सामने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसमें सिंह के खिलाफ कोई मामला नहीं पाया गया था. हालांकि, विशेष न्यायाधीश ने रिपोर्ट को खारिज कर दिया, मामले का संज्ञान लिया और मार्च 2015 में सिंह को सुनवाई (ट्रायल) का सामना करने के लिए समन जारी किया था.

