‘छर्रे’, ‘बिजली के झटके’, ‘कील लगे डंडे’: कॉकरोच पार्टी के संसद मार्च में घायलों की आपबीती
20 जुई को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित 'संसद चलो' मार्च के तहत मध्य दिल्ली में हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारी और छात्र एकत्र हुए थे. इस देशव्यापी आंदोलन की मुख्य मांगें थीं: नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, देश की शिक्षा प्रणाली में व्यापक और ठोस सुधार व हाल ही में हुई छात्र आत्महत्याओं के मामलों में पीड़ितों के लिए न्याय.
याद हो कि उस दिन मूसलाधार बारिश के बावजूद जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में छात्रों, युवाओं, कामकाजी पेशेवरों और परिवारों का हुजूम उमड़ पड़ा था. जहाँ पुलिस का आधिकारिक रुख यह रहा है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए केवल मानक और गैर-घातक (नॉन-लीथल) साधनों का इस्तेमाल किया गया, वहीं 'देबायन दत्ता' द्वारा 20 से अधिक घायलों और प्रत्यक्षदर्शियों के साक्षात्कारों, मेडिकल रिकॉर्ड्स और तस्वीरों की समीक्षा से गंभीर और चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं.
पेलेट गन का इस्तेमाल : शेख इरशाद मंसूरी (25 वर्ष), कनॉट प्लेस के पास आरएएफ जवान द्वारा दागे गए छर्रों से घायल हुए. सर्जरी के जरिए उनकी ठोढ़ी, गर्दन और कंधे से धातु के छर्रे निकाले गए. साहिल लोचब (19 वर्ष), आँख में गोली/प्रोजेक्टाइल लगने से गंभीर रूप से घायल. डॉक्टरों के अनुसार उनकी दाहिनी आँख की रोशनी वापस आने की संभावना केवल 1% है. प्रशांत सिंह (25 वर्ष), आँसू गैस का गोला दूर फेंकने के प्रयास में दाहिने हाथ में छर्रों जैसी चोटें आईं. मेडिकल डिस्चार्ज स्लिप पर "पुलिस द्वारा हमला" लिखा गया.
बिजली के झटके और टीज़र: बैरिकेड्स और लोहे की बाड़ों को छूने पर कई प्रदर्शनकारियों ने तेज़ बिजली के झटके महसूस किए. एक छात्र ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसका पीछा करते हुए टीज़र से विद्युत झटके दिए और डंडों से पीटा.
कील लगे डंडे: प्रदर्शनकारी संदीप कुमार और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिसकर्मियों ने ऐसे डंडों का इस्तेमाल किया जिनमें कीलें लगी हुई थीं, जिससे कई लोगों के शरीर में गहरे छेद और गंभीर घाव हो गए.
रिपोर्ट के अनुसार, जब भीड़ भारी बैरिकेड्स की ओर बढ़ी, तो पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े, हवा में फायरिंग की और अंधाधुंध लाठीचार्ज किया. मुख्य मंच के आगे और पीछे दोहरी परतों वाले बैरिकेड्स लगे होने के कारण लोग बीच में फँस गए. भगदड़ से बचने के लिए सैकड़ों लोग मंच के नीचे छिपने को मजबूर हुए. यह झड़प केवल जंतर-मंतर तक सीमित नहीं रही, बल्कि कनॉट प्लेस, पालिका बाज़ार, टॉलस्टॉय रोड और बाराखम्बा रोड तक फैल गई.
इस बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पेलेट गन के शिकार पीड़ित साहिल लोचब को शुक्रवार को मीडिया के सामने लाकर पुलिस की इस बर्बर कार्रवाई का विरोध किया.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी हिंसा के इरादे से नहीं आए थे; वे केवल सरकार के साथ एक सीधी और साधारण बातचीत चाहते थे. कई घायल अब भी अस्पतालों में या अपने घरों में इस हादसे के शारीरिक और मानसिक आघात से उबर रहे हैं.
कुलमिलाकर, ‘द टेलीग्राफ’ में देबायन की यह रिपोर्ट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि शिक्षा सुधारों की मांग कर रहे छात्रों और नागरिकों के शांत आंदोलन को दबाने के लिए अत्यधिक और संदिग्ध बल-प्रयोग किया गया, जिससे कई युवाओं को स्थायी शारीरिक क्षति पहुँची है.

