भाजपा एजेंटों के मतदाता नाम हटाने के अनुरोध में दिखा पैटर्न, झारखंड के अधिकारियों ने कैसे देखा मामला

झारखंड के गोड्डा जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए भाजपा के बूथ लेवल एजेंट यानी बीएलए की ओर से बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा किए जाने के मामलों में एक पैटर्न सामने आया है. 5 अगस्त को मसौदा मतदाता सूची जारी होने के बाद पिछले एक महीने में कई बूथों पर भाजपा के बीएलए ऐसे मतदाताओं के नाम हटाने के अनुरोध लेकर पहुंचे, जिनमें बड़ी संख्या अल्पसंख्यक समुदाय से थी.

'द इंडियन एक्सप्रेस' की पड़ताल के अनुसार, कम से कम चार बूथों पर बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ ने इन आवेदनों को स्वीकार करने से इनकार किया. अधिकारियों ने कुछ फॉर्म को वास्तविक या प्रक्रिया के अनुरूप नहीं माना. इसके बाद भाजपा ने बीएलओ पर नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया और मामला झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी तक पहुंच गया.

चार बूथों पर सामने आया मामला

बसंतराय क्षेत्र के महेशटिकरी, पचुआ किता, लोचनी और बघाकोल बूथों से फॉर्म-7 को लेकर शिकायतें सामने आईं. प्रखंड विकास अधिकारी और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी श्रीमन मरांडी ने बताया कि उन्हें इन चार बूथों से शिकायतें मिली हैं. उन्होंने कहा कि मामले की क्षेत्रीय जांच के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी.

महेशटिकरी गांव के बूथ नंबर-9 पर भाजपा बीएलए संजीव कुमार रोशन ने 25 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा किए. इन मतदाताओं में अब्दुल मन्नान खान, मोहम्मद नौशाद और मोहम्मद शफीक समेत कई लोग शामिल हैं. जिन मतदाताओं से 'द इंडियन एक्सप्रेस' ने बात की, उन्होंने नाम हटाए जाने की आशंका और इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई.

75 फॉर्म लेकर पहुंचा बीएलए, बाद में जला दिए

पचुआ किता के एक बूथ पर एक भाजपा बीएलए करीब 75 फॉर्म-7 लेकर पहुंचा. बीएलओ मुख्तार के अनुसार, ये फॉर्म उन आधिकारिक फॉर्म से अलग थे जो उन्हें प्रखंड कार्यालय से मिले थे. बीएलओ ने बताया कि बीएलए ने शुरू में फॉर्म के उद्देश्य को लेकर भ्रम की बात कही.

मुख्तार के अनुसार, इन 75 फॉर्म में लगभग सभी नाम मुस्लिम मतदाताओं के थे और ज्यादातर मतदाता 2003 की मतदाता सूची से भी जुड़े हुए थे. जब बीएलओ ने फॉर्म को लेकर सवाल किया तो बीएलए ने कथित तौर पर सभी फॉर्म जला दिए.

बीएलए गनोरी मंडल ने बाद में 'द इंडियन एक्सप्रेस' से कहा कि उसे फॉर्म की सही जानकारी नहीं थी. उसके मुताबिक, भाजपा कार्यकर्ताओं ने उसे ये फॉर्म बीएलओ के पास जमा करने के लिए दिए थे और उसे लगा था कि यह नाम जोड़ने का फॉर्म है.

मतदाताओं ने कहा- पीढ़ियों से यहीं रह रहे हैं

महेशटिकरी गांव के कई लोगों ने बड़े पैमाने पर फॉर्म-7 दाखिल किए जाने को लेकर बीडीओ के पास शिकायत की है. 70 वर्षीय अब्दुल मन्नान खान ने कहा कि उनका परिवार पीढ़ियों से गांव में रह रहा है और उनका नाम 2003 की मतदाता सूची में भी दर्ज था. उन्होंने सवाल किया कि जब उनका घर और पहचान झारखंड में है तो उनका नाम कैसे हटाया जा सकता है.

50 वर्षीय मोहम्मद नौशाद ने बताया कि उनके दादा-दादी के नाम भी 2003 की मतदाता सूची में दर्ज थे. वह मजदूरी के लिए अलग-अलग जगह जाते हैं, लेकिन मतदान झारखंड में ही करते हैं. उन्हें डर है कि अगर नाम हट गया तो सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावित हो सकता है और नागरिकता को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं.

80 वर्षीय मोहम्मद शफीक और उनकी पत्नी बीबी बसीलन ने भी कहा कि वे लंबे समय से महेशटिकरी में मतदाता हैं. शफीक ने बताया कि उनके पास जमीन से जुड़े दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड मौजूद हैं. वहीं मोहम्मद हसमुद्दीन ने कहा कि उनका परिवार पीढ़ियों से उसी घर में रह रहा है और उनके पास जमीन का खतियान भी है.

एसआईआर और फॉर्म-7 के नियम क्या हैं

झारखंड में एसआईआर की प्रक्रिया 30 जून से शुरू हुई थी. 5 अगस्त को जारी मसौदा मतदाता सूची में करीब 43 लाख यानी 16.48% मतदाताओं के नाम हटाए गए थे. फिलहाल दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है, जिसकी अंतिम तारीख 4 सितंबर है.

फॉर्म-7 के जरिए किसी मतदाता का नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट होने के आधार पर हटाने की मांग की जा सकती है. आवेदक को अलग से प्रमाण जमा करना जरूरी नहीं है, लेकिन उसे यह घोषणा करनी होती है कि दी गई जानकारी गलत पाए जाने पर उसके खिलाफ कार्रवाई हो सकती है.

बीडीओ मरांडी ने बड़े पैमाने पर आपत्तियां दाखिल किए जाने पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी मतदाता के नाम पर आपत्ति उसके परिवार की ओर से होनी चाहिए या उसके पीछे ठोस आधार होना चाहिए. उन्होंने कहा कि शुरुआती जानकारी में कुछ ऐसे मतदाता भी सामने आए हैं जो अपने पंजीकृत पते पर ही रह रहे हैं. प्रशासन प्रत्येक नाम हटाने के अनुरोध का क्षेत्रीय सत्यापन करेगा.

भाजपा ने कहा- बीएलए की जिम्मेदारी का हिस्सा

भाजपा के झारखंड एसआईआर संयोजक राकेश प्रसाद ने 27 अगस्त को अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन देकर साहिबगंज और गोड्डा जिलों में एसआईआर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की शिकायत की. भाजपा ने आरोप लगाया कि कुछ बूथों पर उसके बीएलए द्वारा जमा किए गए फॉर्म-7 स्वीकार नहीं किए गए.

पूर्व भाजपा विधायक अमित कुमार मंडल ने कहा कि बीएलए की जिम्मेदारी है कि अगर किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक जगह दर्ज है तो वह उसके खिलाफ आपत्ति दर्ज करे. उन्होंने कहा कि बीएलए को फॉर्म-6 और फॉर्म-8 समेत चुनावी प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न फॉर्म के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई है.

मंडल ने यह भी कहा कि फॉर्म-7 जमा करने की संख्या की कोई निर्धारित सीमा नहीं है और आपत्तियों की वास्तविकता की जांच करना निर्वाचन अधिकारियों की जिम्मेदारी है. उन्होंने बीएलओ पर गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी का भी उल्लेख किया.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने क्या कहा

झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि फॉर्म-7 के जरिए आपत्तियां बड़ी संख्या में भी दाखिल की जा सकती हैं और इसमें अपने आप कोई अवैधता नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर बीएलए को लगता है कि किसी मतदाता का नाम कई राज्यों में दर्ज है तो वह आपत्ति दर्ज कर सकता है.

हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बीएलओ को फॉर्म सीधे खारिज नहीं करना चाहिए. पहले सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी को सूचना दी जानी चाहिए और इसके बाद बीएलओ को अपनी टिप्पणी के साथ रिपोर्ट देनी चाहिए.

इस पूरे विवाद ने एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया, बीएलए और बीएलओ की भूमिका तथा आपत्तियों की जांच को लेकर सवाल खड़े किए हैं. झामुमो के स्थानीय प्रखंड अध्यक्ष सुल्तान अहमद ने इसे मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की "साजिश" बताया. कांग्रेस महासचिव सूर्यकांत शुक्ला ने भी कहा कि पार्टी फॉर्म-7 के जरिए किसी भी लक्षित नाम कटौती पर नजर रख रही है.

फिलहाल प्रशासन की ओर से क्षेत्रीय सत्यापन और जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जिन मतदाताओं के नाम हटाने की मांग की गई है, उनमें कितने वास्तव में नियमों के तहत सूची से हटाए जाने योग्य हैं.

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