झारखंड में मतदाता नाम हटाने वाले फॉर्म की जांच के आदेश

'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के बाद झारखंड के गोड्डा जिले में चुनाव अधिकारियों ने महेशटिकरी गांव के बूथ नंबर-9 पर मतदाताओं के नाम हटाने के लिए जमा किए गए फॉर्म-7 की जांच शुरू कर दी है. बसंतराय के प्रखंड विकास अधिकारी और निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी श्रीमन मरांडी ने बताया कि जिला उप निर्वाचन अधिकारी ने मामले में रिपोर्ट मांगी है और जांच के लिए प्रखंड पंचायती राज अधिकारी को महेशटिकरी भेजा गया है.

मरांडी ने बताया कि प्रखंड पंचायती राज अधिकारी ने गांव पहुंचकर स्थानीय लोगों से बात की और जांच के निष्कर्ष प्रखंड स्तर के अधिकारी को सौंपे जाएंगे. इसके बाद रिपोर्ट उप निर्वाचन अधिकारी को भेजी जाएगी. रिपोर्ट गुरुवार तक आने की उम्मीद है.

फिलहाल जांच महेशटिकरी के बूथ नंबर-9 तक सीमित है. मरांडी के अनुसार, दो-तीन अन्य स्थानों को लेकर स्थानीय स्तर पर आरोप सामने आए हैं, लेकिन इनके संबंध में कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है. बीएलए और मतदाताओं की ओर से मिली शिकायतें बूथ नंबर-9 से जुड़ी हैं, इसलिए औपचारिक जांच भी इसी बूथ पर केंद्रित है.

गोड्डा के कम से कम चार बूथों पर बूथ लेवल अधिकारियों यानी बीएलओ ने फॉर्म-7 के जरिए मतदाताओं के नाम हटाने के आवेदनों को स्वीकार करने से इनकार किया था. बीएलओ ने इन फॉर्म को वास्तविक या प्रक्रिया के अनुरूप नहीं होने को लेकर आपत्ति जताई थी. आवेदन भाजपा के बूथ लेवल एजेंट यानी बीएलए लेकर पहुंचे थे और अधिकांश मतदाता अल्पसंख्यक समुदाय से थे.

महेशटिकरी के बूथ नंबर-9 पर भाजपा बीएलए संजीव कुमार रोशन ने 25 मतदाताओं के नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा किए थे. इन मतदाताओं से बातचीत में नाम हटाए जाने और इसके कारण मतदान के अधिकार तथा सरकारी योजनाओं के लाभ पर असर पड़ने की आशंका सामने आई थी.

मामला सामने आने के बाद मरांडी ने बूथ नंबर-9 की बीएलओ से प्रारंभिक सत्यापन भी कराया था. बीएलओ के अनुसार, 25 में से 24 मतदाता गांव में ही मौजूद थे. 25वां व्यक्ति भी गांव का निवासी था, लेकिन मजदूरी के लिए दो-तीन महीने से बाहर था. मरांडी ने कहा कि ये सभी ऐसे लोग हैं जिन्हें बीएलओ नियमित रूप से देखती हैं और जो गांव के स्थायी निवासी हैं.

पड़ोसी बूथ पर एक भाजपा बीएलए करीब 75 फॉर्म-7 लेकर पहुंचा था. बीएलओ द्वारा सवाल किए जाने के बाद बीएलए ने कथित तौर पर सभी फॉर्म मौके पर ही जला दिए. बाद में उसने बताया कि उसे फॉर्म के उद्देश्य की जानकारी नहीं थी और भाजपा कार्यकर्ताओं ने उसे ये फॉर्म बीएलओ के पास जमा करने के लिए दिए थे.

मरांडी ने बताया कि शुरुआती शिकायतों के बाद बीएलओ को ऐसे फॉर्म पर कार्रवाई नहीं करने को कहा गया था, क्योंकि अधिकारियों को इनके स्रोत को लेकर स्पष्टता नहीं थी. हालांकि, अब बीएलओ को निर्देश दिया गया है कि अगर फॉर्म-7 को लेकर कोई संदेह या भ्रम हो तो आवेदन स्वीकार करने से सीधे इनकार न करें, बल्कि मामले को संबंधित निर्वाचन अधिकारी के सामने रखें.

मरांडी ने बताया कि उन्होंने झारखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के. रवि कुमार से भी इस मुद्दे पर बात की है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-7 के आवेदन स्वीकार किए जाने चाहिए और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनकी जांच और कार्रवाई होनी चाहिए.

फॉर्म-7 का इस्तेमाल किसी मतदाता का नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट होने जैसे आधार पर हटाने की मांग के लिए किया जाता है. हालांकि, नाम हटाने से पहले निर्धारित प्रक्रिया और सत्यापन का पालन किया जाना जरूरी है.

अब प्रशासन की औपचारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार है. रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि बूथ नंबर-9 पर दाखिल किए गए फॉर्म-7 के पीछे लगाए गए दावे कितने सही थे और क्या मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन किया गया था.

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