‘एसआईआर’ के कारण अपनी बेटी की शादी में शामिल नहीं हो सके ‘द टेलीग्राफ’ के पूर्व संपादक, केरल के सीएम का सुवेंदु को पत्र
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को पत्र लिखकर 'द टेलीग्राफ' के पूर्व संपादक आर. राजगोपाल के पासपोर्ट नवीनीकरण मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत कोलकाता के बालीगंज निर्वाचन क्षेत्र से राजगोपाल का नाम हटा दिया गया है. इसी आधार पर कोलकाता पुलिस ने प्रतिकूल सत्यापन रिपोर्ट दी है, जिसके कारण 19 मार्च को बायोमेट्रिक औपचारिकताएं पूरी करने और वैकल्पिक दस्तावेज देने के बावजूद उनका पासपोर्ट नवीनीकरण रोक दिया गया है.
‘द टेलीग्राफ ब्यूरो’ के मुताबिक, पासपोर्ट न मिलने के कारण राजगोपाल 17 अप्रैल को सैन फ्रांसिस्को में अपनी बेटी की शादी में शामिल नहीं हो सके. उन्होंने इसे "नागरिक अनिश्चितता की स्थिति" बताया है और कहा कि मेरा इरादा कभी भी खुद को एक पीड़ित के रूप में पेश करने का नहीं रहा है, बल्कि मैं एक बड़े बिंदु को रेखांकित करना चाहता था: यदि कोई व्यक्ति जिसने अपना पूरा पेशेवर जीवन पत्रकारिता में बिताया और एक अपेक्षाकृत जाने-माने समाचार पत्र का संपादन किया, उसे इस तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है, तो कोई केवल कल्पना ही कर सकता है कि वास्तव में हाशिए पर मौजूद लोगों को क्या-क्या झेलना पड़ता होगा.”
एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने नौकरशाही के इस रवैये की निंदा की है. गिल्ड के अनुसार, बंगाल चुनाव से पहले एसआईआर के कारण लगभग 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिससे लाखों लोग मताधिकार से वंचित होकर पीड़ा झेल रहे हैं. फिलहाल इन मामलों की अपील न्यायाधिकरणों (ट्रिब्यूनल) के समक्ष लंबित है.
मई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि मतदाता सूची के लिए नागरिकता की सीमित जांच हो सकती है, लेकिन इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता. हालांकि, व्यावहारिक रूप से नाम हटने के कारण लोगों को सरकारी लाभों से वंचित किया जा रहा है; जैसे बंगाल सरकार ने साफ किया है कि एसआईआर में हटाए गए लोग ₹3,000 के मासिक भुगतान के पात्र नहीं होंगे.

