मानसून की कमजोर शुरुआत के बाद किसानों ने धान, कपास और सोयाबीन की बुवाई घटाई

कमजोर मानसून की शुरुआत के कारण अब तक औसत से कम बारिश होने की वजह से भारतीय किसान धान, कपास, मक्का और सोयाबीन सहित खरीफ (गर्मी) फसलों की बुवाई में पिछड़ गए हैं.

‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है, जो वैश्विक निर्यात का लगभग 40% हिस्सा संभालता है. यहाँ के किसान वार्षिक मानसून के आगमन के साथ जून और जुलाई में खरीफ फसलों की बुवाई शुरू करते हैं, लेकिन इस साल मानसून दक्षिणी राज्य केरल में तीन दिन की देरी से पहुंचा और पश्चिमी कृषि क्षेत्रों में इसकी प्रगति लगभग दो सप्ताह तक रुकी रही. हालांकि, मानसून के रफ्तार पकड़ने के लिए अभी भी समय है, और बुवाई में देरी के कारण कीमतों पर पड़ने वाला प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है. इसके अलावा, सरकारी गोदामों में चावल के भारी स्टॉक से भी राहत मिलनी चाहिए, जो एक साल पहले की तुलना में 15% बढ़कर जून की शुरुआत के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया है.

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, किसानों ने 25 जून तक 18.27 मिलियन (1.82 करोड़) हेक्टेयर भूमि पर खरीफ फसलों की बुवाई की है, जो एक साल पहले की तुलना में लगभग 23% कम है.

आंकड़ों के अनुसार, धान (चावल) का रकबा 2.58 मिलियन (25.8 लाख) हेक्टेयर रहा, जो पिछले साल के 3.44 मिलियन (34.4 लाख) हेक्टेयर से कम है.किसानों ने 692,000 (6.92 लाख) हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई की है, जो एक साल पहले की तुलना में 65% कम है. मक्के की बुवाई 1.57 मिलियन (15.7 लाख) हेक्टेयर में की गई थी, जिसमें 16% की कमी दर्ज की गई. कपास का रकबा 35% घटकर 2.97 मिलियन (29.7 लाख) हेक्टेयर रह गया, जबकि गन्ने का रकबा 1.2% बढ़कर 5.7 मिलियन (57 लाख) हेक्टेयर हो गया.

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून को चार महीने के मानसून सीजन की शुरुआत के बाद से देश में अब तक सामान्य से 42% कम बारिश हुई है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में यह कमी 92% जितनी अधिक है.

मुंबई में एक वैश्विक ट्रेड हाउस के लिए काम करने वाले एक डीलर ने (नाम न छापने की शर्त पर) कहा कि किसानों को बुवाई के बचे हुए समय का लाभ उठाने के लिए जुलाई के पहले पखवाड़े (पहले 15 दिनों) में पर्याप्त बारिश की आवश्यकता होगी. उन्होंने आगे कहा कि यदि बारिश की कमी लगातार बनी रहती है, तो इससे फसलों की पैदावार के साथ-साथ बुवाई का कुल क्षेत्रफल भी प्रभावित होगा.

चावल निर्यात में दबदबा रखने के साथ-साथ, भारत वनस्पति तेलों का भी सबसे बड़ा आयातक है. भारत अपनी अधिकांश जरूरतों के लिए इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम तेल, तथा अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन से सोया तेल और सूरजमुखी तेल का आयात करता है.

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