इथेनॉल-मिश्रित डीजल सुरक्षा परीक्षणों में हुआ विफल, केंद्र ने फिलहाल व्यापक इस्तेमाल से किया इनकार
इथेनॉल-मिश्रित डीजल सुरक्षा मापदंडों पर खरा नहीं उतरा है. सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों, प्रयोगशालाओं और वाहन निर्माताओं द्वारा किए गए वैज्ञानिक मूल्यांकन में पाया गया कि इथेनॉल मिलाने से डीजल का फ्लैश प्वाइंट अत्यधिक कम हो जाता है. इसलिए, जब तक इस तकनीकी समस्या का समाधान नहीं हो जाता, सरकार ने इसके व्यापक इस्तेमाल से इनकार किया है. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने संसद में यह जानकारी दी.
इसके अलावा, सरकार ने स्पष्ट किया कि डीजल में आइसोबुटानॉल मिलाने या पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को 20% से अधिक बढ़ाने पर फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया गया है.
‘पीटीआई’ के अनुसार, घरेलू स्तर पर इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ब्याज-सब्सिडी, डिस्टिलरी अपग्रेडेशन और दीर्घकालिक खरीद समझौतों जैसे उपाय कर रही है. वर्ष 2025-26 के लिए तेल कंपनियों ने 10.485 अरब लीटर इथेनॉल आवंटित किया है. उन्होंने बताया कि भारत एलपीजी आयात पर निर्भरता घटाना चाहता है, इसलिए सरकार इथेनॉल को खाना पकाने के वैकल्पिक एवं स्वच्छ ईंधन के रूप में विकसित करने पर विचार कर रही है.

