“हममें से कोई भी ठीक से सांस नहीं ले पा रहा था”: अरुणाचल में बांध विरोधी शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक हुआ, कई घायल

‘मकतूब मीडिया’ में निकिता जैन की रिपोर्ट के मुताबिक, अरुणाचल प्रदेश के सियांग क्षेत्र में सियांग अपर मल्टीपर्पज परियोजना के विरोध और बांध विरोधी आंदोलन से जुड़े 10 कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग को लेकर शुक्रवार को बुलाए गए 12 घंटे के बंद के दौरान सुरक्षा बलों ने आंसू गैस के गोले दागे. इस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए, जिनमें ज्यादातर महिलाएं थीं. घटना के बाद पूर्वी सियांग जिले के पासीघाट में तनाव फैल गया और शनिवार को भी स्थिति संवेदनशील बनी रही.

आदि आदिवासी समुदाय के युवाओं ने बंद में हिस्सा लिया था. प्रदर्शनकारियों के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत शांतिपूर्ण तरीके से हुई थी, लेकिन सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद हालात बिगड़ गए. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि छह से अधिक लोग घायल हुए, जबकि कई मामूली चोटों के मामले दर्ज नहीं हो सके. सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले इस्तेमाल किए जाते दिखाई दिए. एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि लोगों और बच्चों पर लगातार आंसू गैस छोड़ी गई, जिससे उन्हें सांस लेने में कठिनाई हुई. उसने सवाल उठाया कि इस कार्रवाई की जिम्मेदारी कौन लेगा.

हालांकि, सियांग के पुलिस अधीक्षक कामदाम सिखोम ने कहा कि ऊपरी सियांग जिले के गेकू और कोमकर क्षेत्रों से करीब 150 से 200 प्रदर्शनकारी सुबह सात बजे दिते-दिमे में जुटे थे. उनके मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ने की कोशिश की, पत्थर फेंके और निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया. दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे लोगों पर आंसू गैस का इस्तेमाल किए जाने के बाद स्थिति बिगड़ी.

‘अरुणाचल टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, शाम तक हालात बेकाबू हो गए. गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय जलविद्युत निगम (एनएचपीसी) के स्थानीय कार्यालय में आग लगा दी. पासीघाट पुलिस थाने के कुछ हिस्सों में तोड़फोड़ की गई और सात वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया. भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कलिंग मोयोंग और विधायक निनोंग एरिंग के पारिवारिक घरों में भी तोड़फोड़ की खबर सामने आई. शनिवार को दुकानों और कारोबारी प्रतिष्ठानों के बंद रहने की सूचना मिली.

9 अक्टूबर को गेकू गांव के 10 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था. वे सियांग इंडिजिनस फार्मर्स फोरम (एसआईएफएफ) से जुड़े हैं, जो आदि समुदाय के किसानों का प्रतिनिधित्व करता है. इनमें से चार पर अरुणाचल प्रदेश गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 2014 के तहत आरोप लगाए गए हैं. संगठन वर्षों से परियोजना के सर्वेक्षण का विरोध कर रहा है. उसका कहना है कि बांध से पुश्तैनी जमीन डूब सकती है और स्थानीय लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ सकता है.

मानवाधिकार वकील एबो मिली और युवा नेता ओतुल जेरांग ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने से पहले वीडियो जारी कर आंदोलन का पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि युवा हिंसा में शामिल नहीं थे. पत्रकारों ने भी आंदोलन से जुड़े लोगों पर निगरानी और कथित झूठे मुकदमों के जरिए दबाव बनाने की शिकायत की.

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने हिंसा पर अफसोस जताते हुए परियोजना का विरोध करने वाले संगठनों और समुदाय के प्रतिनिधियों से बातचीत की पेशकश की. उन्होंने कहा कि सरकार परियोजना के संभावित लाभ, नुकसान और स्थानीय लोगों की चिंताओं पर चर्चा के लिए तैयार है.

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