मुंबई की मुस्लिम बहुल बस्ती में एसआईआर फॉर्म जमा करने के बावजूद मतदाता सूची से कटे नाम

‘आर्टिकल 14’ कविता अय्यर की रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई के मालवणी और अंबुजवाड़ी की मुस्लिम बहुल बस्तियों में कई लोगों ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत गणना फॉर्म जमा किए, लेकिन महाराष्ट्र की प्रारूप मतदाता सूची में उनके नाम ‘अनुपस्थित’ या ‘स्थानांतरित’ घोषित कर दिए गए. कई निवासियों के पास बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के हस्ताक्षर वाली रसीदें भी हैं. इसके बावजूद उन्हें नाम दोबारा जुड़वाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं.

46 वर्षीय नूरजहां इलियास शेख ने कभी मतदान नहीं छोड़ा. मालवणी में कांग्रेस की बूथ लेवल एजेंट नूरजहां ने एसआईआर फॉर्म जमा किया था और बीएलओ से रसीद भी मिली थी. इसके बावजूद 31 अगस्त को जारी प्रारूप मतदाता सूची में उनका नाम ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ श्रेणी में दर्ज था. उन्हें नाम, पते या उम्र में किसी गड़बड़ी को लेकर कोई नोटिस भी नहीं मिला. उनका कहना है कि अधिकारी शिकायतों का जवाब नहीं दे रहे हैं.

ओल्ड कलेक्टर कंपाउंड, न्यू कलेक्टर कंपाउंड और अंबुजवाड़ी में कई लोगों ने बताया कि उन्होंने मतदाता पहचान पत्र, आधार संबंधी जानकारी, वर्ष 2002 की मतदाता सूची में नाम का विवरण और माता-पिता के मतदाता पहचान पत्र की जानकारी के साथ फॉर्म जमा किए थे. फिर भी उनके नाम अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, दोहरी प्रविष्टि या अन्य कारणों वाली ‘एएसडीडीओ’ श्रेणी में डाल दिए गए.

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, पिछली मतदाता सूची के 21 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं थे, क्योंकि उनके गणना फॉर्म एकत्र नहीं किए गए थे. अधिकारियों ने इसके पीछे मतदाताओं का घर पर न मिलना, स्थानांतरण, मृत्यु, दूसरी जगह पंजीकरण और दोहरी प्रविष्टि जैसे कारण बताए. हालांकि, कई निवासियों के पास फॉर्म जमा करने की हस्ताक्षरित रसीदें मौजूद हैं.

67 वर्षीय नैक्सन नाटके और उनके बेटे का नाम भी सूची से हटा दिया गया, जबकि परिवार के अन्य सदस्यों के नाम बने रहे. नाटके ने बताया कि 18 वर्ष की उम्र से उन्होंने कभी मतदान नहीं छोड़ा. इसके बावजूद उन्हें पहली बार मतदाता बनने वालों के लिए निर्धारित फॉर्म-6 भरने को कहा गया. इस फॉर्म में घोषणा करनी होती है कि आवेदक का नाम पहले किसी विधानसभा या संसदीय क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल नहीं है. नाटके के अनुसार, बीएलओ ने उन्हें घोषणा वाले हिस्से को काटकर फॉर्म जमा करने के लिए कहा.

प्रवासी परिवारों की चिंता

बिहार के कैमूर जिले के मीर हसन अंसारी और उनकी पत्नी करीब 25 वर्षों से अंबुजवाड़ी में रह रहे हैं. उन्होंने अपने पैतृक गांव में नाम हटवाने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद मुंबई में एसआईआर फॉर्म जमा किए, लेकिन दोनों के नाम सूची से गायब मिले. पश्चिम बंगाल के स्वरूपनगर से आने वाली अरिफा बीबी सरदार के बेटे का नाम भी हटा दिया गया, जबकि परिवार के अन्य सदस्यों के नाम शामिल थे. बिहार के सीतामढ़ी की मजीबुन्निसा शेख के पति का नाम भी सूची में नहीं था, जबकि दोनों ने एक ही दिन फॉर्म जमा किए थे.

इन परिवारों को आशंका है कि मतदाता सूची से नाम हटने के कारण उनकी नागरिकता पर सवाल उठ सकते हैं. अंबुजवाड़ी के निवासी इरफान अकरम खान के माता-पिता के नाम भी सूची से हट गए हैं. अनाथ इरफान ने फॉर्म जमा करने की रसीद मिलने के बावजूद अपना नाम गायब पाया. उनके लिए परिवार के पुराने मतदाता रिकॉर्ड के जरिए पहचान साबित करना मुश्किल है.

आश्वासन और जमीनी हकीकत

अक्टूबर की शुरुआत में महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने आश्वासन दिया था कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर नहीं रहेगा. घर-घर जाकर सत्यापन, विशेष पंजीकरण शिविर और सहायता केंद्र खोलने की घोषणा भी की गई. लेकिन मालवणी के निवासियों का कहना है कि बीएलओ उपलब्ध नहीं रहते और अधिकारियों तक पहुंचना मुश्किल है.

अंबुजवाड़ी की नजोसन बानू शेख ने आरोप लगाया कि नाम दोबारा जुड़वाने के लिए एक अधिकारी ने उनसे 2,000 रुपये मांगे. आर्टिकल 14 इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर सका. कई निवासियों ने यह भी बताया कि संबंधित कार्यालय तक पहुंचने में आधा दिन और मजदूरी खर्च हो जाती है.

समीर हसन शेख का नाम भी ‘अनुपस्थित’ श्रेणी में डाल दिया गया, जबकि उनके परिवार के अन्य सदस्यों के नाम सूची में थे. उनकी पत्नी शाहीन ने सवाल उठाया कि यदि लोग मतदान का अधिकार खो देंगे, तो अपनी भारतीय नागरिकता कैसे साबित करेंगे. शहनाज बेगम और शगुफ्ता इमरान मंसूरी जैसी अन्य महिलाओं ने भी फॉर्म जमा करने और पहले मतदान करने के बावजूद नाम हटाए जाने की शिकायत की.

नूरजहां शेख के अनुसार, एसआईआर प्रक्रिया में बीएलओ की जिम्मेदारी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल हैं. प्रभावित परिवार मांग कर रहे हैं कि उनके नाम हटाने के कारण बताए जाएं, जमा किए गए फॉर्म की जांच हो और गलतियों को सुधारने की प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए.

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