विकास और आर्थिक प्रगति के दावों के बीच भारत में भूख और कुपोषण की समस्या गंभीर बनी हुई है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2026 में भारत 122 देशों में 100वें स्थान पर रहा है. भारत का स्कोर 24.1 है, जो उसे भूख की गंभीर स्थिति वाली श्रेणी में रखता है. पिछले वर्ष भारत 123 देशों में 102वें स्थान पर था. रैंकिंग में मामूली सुधार के बावजूद देश में कुपोषण और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं.
ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की स्थिति को समझने के लिए बच्चों में कुपोषण के आंकड़े महत्वपूर्ण हैं. रिपोर्ट के अनुसार, भारत में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में वेस्टिंग यानी लंबाई के अनुपात में कम वजन की दर 19 प्रतिशत है. यह बच्चों में गंभीर पोषण संबंधी समस्या को दर्शाती है. बच्चों के पोषण की स्थिति किसी देश में भोजन की उपलब्धता के साथ-साथ उसके वितरण, आहार की गुणवत्ता और लोगों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने की क्षमता से भी जुड़ी होती है.
क्षेत्रीय तुलना में नेपाल और बांग्लादेश जैसे देशों की स्थिति भारत से बेहतर बताई गई है, जबकि पाकिस्तान भी इस सूचकांक में शामिल है. ये आंकड़े दक्षिण एशिया में भूख और कुपोषण की समस्या की व्यापकता के साथ-साथ अलग-अलग देशों की स्थिति में मौजूद अंतर को सामने रखते हैं.
भारत ने ग्लोबल हंगर इंडेक्स की कार्यप्रणाली और आंकड़ों को लेकर आपत्तियां जताई हैं. भारत की ओर से सूचकांक में इस्तेमाल किए जाने वाले मानकों और पद्धति पर सवाल उठाए गए हैं. हालांकि, रैंकिंग में भारत की स्थिति और बच्चों में कुपोषण से जुड़े आंकड़े देश की खाद्य सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं.
देश में खाद्यान्न वितरण की व्यापक व्यवस्था होने के बावजूद भोजन की गुणवत्ता और विविधता का सवाल महत्वपूर्ण बना हुआ है. केवल अनाज की उपलब्धता से पोषण संबंधी जरूरतें पूरी नहीं होतीं. संतुलित आहार तक पहुंच, भोजन में जरूरी पोषक तत्वों की मौजूदगी और कमजोर सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों में रहने वाले लोगों की जरूरतें भी इस समस्या से जुड़ी हैं.
महिलाओं और आदिवासी समुदायों के बीच पोषण संबंधी चुनौतियां भी खाद्य सुरक्षा की चर्चा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. इसके अतिरिक्त, जलवायु परिवर्तन और उससे कृषि तथा खाद्य उपलब्धता पर पड़ने वाले प्रभाव भी पोषण सुरक्षा के संदर्भ में प्रासंगिक हैं.
ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की रैंकिंग में सुधार हुआ है, लेकिन 24.1 का स्कोर और बच्चों में 19 प्रतिशत वेस्टिंग की दर बताते हैं कि भूख और कुपोषण की समस्या अब भी गंभीर है. विकास के आंकड़ों के साथ यह देखना भी जरूरी है कि लोगों को पर्याप्त, गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो पा रहा है या नहीं.
(यह विकास पराश्रम मेश्राम का’ कॉउंटरकरंट्स’ में प्रकाशित उनके मूल अंग्रेजी लेख का हिंदी में अनूदित सारांश है.)

