निधीश त्यागी, साथ में राजेश चतुर्वेदी, गौरव नौड़ियाल, फ़लक अफ़शां और विश्वजीत कुमार
आज की सबसे बड़ी खबर रसोई गैस के संकट से जुड़ी है. पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की आग अब भारत के गरीब और मध्यम वर्ग की रसोई तक पहुँच गई है. आलम यह है कि दिल्ली-एनसीआर से मजदूर और छात्र भारी संख्या में अपने गाँवों की ओर ‘उल्टा पलायन’ कर रहे हैं क्योंकि वे ₹700 प्रति किलो तक बिक रही गैस का खर्च नहीं उठा सकते. दूसरी ओर, दक्षिण भारत में भाषा को लेकर एक बार फिर तलवारें खिंच गई हैं. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने केंद्र के नए सीबीएसई ढांचे को ‘हिंदी थोपने’ का गुप्त तरीका बताया है, तो वहीं जवाब में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के गृह राज्य ओडिशा में अब दुकानों पर ओडिया साइनबोर्ड अनिवार्य कर दिए गए हैं. साथ ही, रक्षा क्षेत्र से एक बड़ी और गर्व की खबर है—भारत ने अपनी तीसरी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिधमन को नौसेना में शामिल कर लिया है, जिससे हमारी समुद्री ताकत कई गुना बढ़ गई है.











