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ट्रांसजेंडर बिल 2026: क्या सरकार आपकी पहचान तय करेगी? | अवतारी देवी #harkara

‘हरकारा’ यानी हिंदी भाषियों के लिए क्यूरेटेड न्यूजलेटर. ज़रूरी ख़बरें और विश्लेषण. शोर कम, रोशनी ज़्यादा.

भारत में ट्रांसजेंडर अधिकारों को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है. 2026 के नए ट्रांसजेंडर संशोधन बिल में खुद की पहचान को हटाए जाने के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं.

इस एपिसोड में, हरकारा डीप डाइव पर निधीश त्यागी ने फिल्ममेकर और परफॉर्मेंस आर्टिस्ट स्वजा सारांश (अवतारी देवी) से विस्तार से बातचीत की. चर्चा में समझने की कोशिश की गई कि:

क्या अब व्यक्ति अपनी जेंडर पहचान खुद तय नहीं कर पाएगा?
मेडिकल बोर्ड और सरकारी सर्टिफिकेट क्यों जरूरी बनाए जा रहे हैं?
क्या यह कानून ट्रांस समुदाय के अधिकारों को सीमित करता है?
जेंडर और सेक्स में क्या फर्क है?
और क्यों यह मुद्दा सिर्फ ट्रांस लोगों का नहीं, बल्कि हर नागरिक की आज़ादी से जुड़ा है?

बातचीत में यह भी सामने आया कि नया कानून कई पहचान जैसे नॉन बाइनरी और जेंडरक्वीर को नजरअंदाज करता है, और एक जटिल प्रक्रिया के जरिए पहचान को नियंत्रित करता है. साथ ही, देशभर में इस बिल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और आंदोलन जारी हैं, क्योंकि इसे कई लोग गैर-वैज्ञानिक और अधिकारों के खिलाफ मान रहे हैं. देखें पूरी वीडियो.

पाठकों से अपील :

आज के लिए इतना ही. हमें बताइये अपनी प्रतिक्रिया, सुझाव, टिप्पणी. मिलेंगे हरकारा के अगले अंक के साथ. हरकारा सब्सटैक पर तो है ही, आप यहाँ भी पा सकते हैं ‘हरकारा’...शोर कम, रोशनी ज्यादा. व्हाट्सएप पर, लिंक्डइन पर, इंस्टा पर, फेसबुक पर, यूट्यूब पर, स्पोटीफाई पर , ट्विटर / एक्स और ब्लू स्काई पर.

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