हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में प्रोफेसर अपूर्वानंद के साथ आरएसएस के 100 साल, हिंदू राष्ट्र की अवधारणा और उसके वर्तमान प्रभाव पर गंभीर चर्चा की गई. बातचीत में यह सवाल उठाया गया कि क्या आरएसएस की मूल विचारधारा समय के साथ बदली है या वही विचार आज सत्ता और संस्थानों के माध्यम से और मज़बूत हुआ है.
चर्चा में सावरकर और गोलवलकर की उस सोच पर बात हुई जिसमें भारत को हिंदुओं की पितृभूमि और पुण्यभूमि बताया गया और हिंदू जीवन शैली को राष्ट्रीय पहचान के रूप में स्थापित करने की कोशिश की गई. मोहन भागवत के हालिया बयानों, जैसे तीन बच्चे पैदा करने की अपील और यह दावा कि कोई भी हिंदू सरसंघचालक बन सकता है, को इसी व्यापक राजनीतिक और वैचारिक संदर्भ में समझने की कोशिश की गई.
बातचीत में यह भी चर्चा हुई कि शिक्षा संस्थानों, सांस्कृतिक संस्थाओं और सरकारी नीतियों पर आरएसएस के प्रभाव को लेकर क्यों सवाल उठ रहे हैं. संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं, जाति व्यवस्था, ब्राह्मणवादी सोच और सामाजिक समानता के मुद्दों को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आईं.
यह चर्चा केवल आरएसएस या किसी एक संगठन की नहीं, बल्कि उस दिशा की है जिसमें देश, लोकतंत्र और समाज आगे बढ़ रहा है. पूरी बातचीत देखें और समझें कि यह बहस हमारे वर्तमान और भविष्य के लिए क्यों महत्वपूर्ण है.
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