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एसिड अटैक के बाद 16 साल की लड़ाई: शाहीन मलिक की कहानी, सिस्टम की चुप्पी और अधूरा इंसाफ़. #harkara

हरकारा : ढंग की बातचीत तसल्ली से बढ़ाने का बिरला अड्डा

हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में हम एक ऐसी कहानी के भीतर जाते हैं, जो सिर्फ़ एक अपराध की नहीं, बल्कि हमारे सिस्टम, समाज और न्याय प्रक्रिया की गहरी विफलताओं की कहानी है. शाहीन मलिक बताती हैं कि कैसे 19 नवंबर 2009 को एक हमले ने उनकी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल दी. पढ़ाई, करियर और सपनों से भरी ज़िंदगी अचानक अस्पतालों, सर्जरीज़, कोर्ट और थानों के चक्कर में बदल गई. इस बातचीत में शाहीन विस्तार से बताती हैं कि: एसिड अटैक के तुरंत बाद क्या हुआ.पुलिस जांच में हुई लापरवाही.16 साल लंबी कानूनी लड़ाई.कैसे मुख्य आरोपी बरी हो गए.और कैसे पीड़िता को आज भी इंसाफ़ का इंतज़ार है.साथ ही, वह यह भी बताती हैं कि एसिड अटैक सिर्फ़ एक दिन का हमला नहीं, बल्कि ज़िंदगी भर की सज़ा है, जिसमें शारीरिक दर्द, मानसिक आघात, सामाजिक भेदभाव और आर्थिक संघर्ष शामिल हैं. शाहीन मलिक आज Brave Souls Foundation के ज़रिए सैकड़ों एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए इलाज, लीगल एड, रिहैबिलिटेशन और सम्मानजनक जीवन की लड़ाई लड़ रही हैं. यह एपिसोड सिर्फ़ एक इंटरव्यू नहीं, बल्कि एक सवाल है कि जब पीड़ित 16 साल लड़ती है और आरोपी आज़ाद घूमते हैं, तो न्याय किसके लिए है?

अपील :

आज के लिए इतना ही. हमें बताइये अपनी प्रतिक्रिया, सुझाव, टिप्पणी. मिलेंगे हरकारा के अगले अंक के साथ. हरकारा सब्सटैक पर तो है ही, आप यहाँ भी पा सकते हैं ‘हरकारा’...शोर कम, रोशनी ज्यादा. व्हाट्सएप पर, लिंक्डइन पर, इंस्टा पर, फेसबुक पर, यूट्यूब पर, स्पोटीफाई पर , ट्विटर / एक्स और ब्लू स्काई पर.

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