0:00
/
0:00
Transcript

मोदी की नेतन्याहू के साथ गलेपड़े दोस्ती:दबाव या कोई गुप्त सौदा? श्रवण गर्ग #harkara

‘हरकारा’ यानी हिंदी भाषियों के लिए क्यूरेटेड न्यूजलेटर. ज़रूरी ख़बरें और विश्लेषण. शोर कम, रोशनी ज़्यादा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इज़राइल यात्रा कई गंभीर सवाल खड़े करती है. ऐसे समय में जब गाज़ा में 75 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और नेतन्याहू पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में आरोप लंबित हैं, भारत के प्रधानमंत्री का नेसेट में जाकर 140 करोड़ भारतीयों की ओर से समर्थन जताना क्या संदेश देता है?

हरकारा डीप डाइव में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग के साथ इस यात्रा के समय, संदर्भ और संकेतों को गहराई से समझने की कोशिश की गई. यात्रा का कोई घोषित एजेंडा नहीं था. न कोई उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल, न किसी बड़े समझौते की सार्वजनिक जानकारी. फिर यह दौरा क्यों और अभी क्यों?

चर्चा में ट्रंप के उस बयान का भी ज़िक्र हुआ जिसमें उन्होंने दावा किया कि भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध टालने का श्रेय उन्हें जाता है. साथ ही एपस्टीन फाइल्स, मोसाद, अंतरराष्ट्रीय खुफिया गतिविधियों और भारत-इजराइल रक्षा संबंधों के व्यापक संदर्भ को भी उठाया गया.

क्या यह यात्रा केवल कूटनीतिक औपचारिकता थी या इसके पीछे कोई गहरा रणनीतिक समीकरण है? क्या भारत की अंतरराष्ट्रीय साख और लोकतांत्रिक छवि इस प्रक्रिया में दांव पर है? और क्या संसद से पहले इस यात्रा का कोई राजनीतिक अर्थ है?

इन सभी सवालों पर गंभीर और तथ्याधारित चर्चा इस एपिसोड में.

अपील :

आज के लिए इतना ही. हमें बताइये अपनी प्रतिक्रिया, सुझाव, टिप्पणी. मिलेंगे हरकारा के अगले अंक के साथ. हरकारा सब्सटैक पर तो है ही, आप यहाँ भी पा सकते हैं ‘हरकारा’...शोर कम, रोशनी ज्यादा. व्हाट्सएप पर, लिंक्डइन पर, इंस्टा पर, फेसबुक पर, यूट्यूब पर, स्पोटीफाई पर , ट्विटर / एक्स और ब्लू स्काई पर.

Thanks for reading हरकारा : ढंग की बातचीत तसल्ली से बढ़ाने का बिरला अड्डा! This post is public so feel free to share it.

Share

Discussion about this video

User's avatar

Ready for more?