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मुख्यमंत्री खुलेआम नफरत फैला रहे हैं, संस्थाएँ चुप हैं, भारत किस मोड़ पर खड़ा है? श्रवण गर्ग

‘हरकारा’ यानी हिंदी भाषियों के लिए क्यूरेटेड न्यूजलेटर. ज़रूरी ख़बरें और विश्लेषण. शोर कम, रोशनी ज़्यादा.

हरकारा डीप डाइव के विशेष बातचीत में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग भारत में बढ़ती हेट स्पीच और सत्ता में बैठे नेताओं की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हैं. चर्चा का केंद्र असम के मुख्यमंत्री हेमंता बिस्वा शर्मा हैं, जिनके बयान और नीतिगत कदम मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाते दिखाई देते हैं. वोटर लिस्ट से लाखों नाम काटने की बातें, लोगों को डराने के निर्देश और बड़े पैमाने पर घरों से बेदखली जैसी घटनाएँ केवल एक राज्य की कहानी नहीं रह जातीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय बन जाती हैं.

इसी समय संसद में “विकसित भारत 2047” की बात की जा रही है, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त इससे बिल्कुल अलग नज़र आती है. सवाल यह उठता है कि जब मुख्यमंत्री खुले मंच से नफरत फैलाते हैं, तब सुप्रीम कोर्ट, प्रधानमंत्री, विपक्ष और मीडिया की चुप्पी का क्या मतलब है. यह बातचीत स्पष्ट करती है कि यह लड़ाई किसी एक समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि भारत के संविधान और नागरिक अधिकारों के खिलाफ है.

यह वीडियो दर्शकों से यह सोचने का आग्रह करता है कि यह देश किसका है और एक नागरिक के रूप में चुप रहना क्या हमें भी इस स्थिति का हिस्सा बना देता है. लोकतंत्र केवल चुनावों से नहीं, बल्कि असहमति और सवाल उठाने से ज़िंदा रहता है. इस चर्चा को देखें, समझें और अपनी राय दर्ज करें.

पाठकों से अपील :

आज के लिए इतना ही. हमें बताइये अपनी प्रतिक्रिया, सुझाव, टिप्पणी. मिलेंगे हरकारा के अगले अंक के साथ. हरकारा सब्सटैक पर तो है ही, आप यहाँ भी पा सकते हैं ‘हरकारा’...शोर कम, रोशनी ज्यादा. व्हाट्सएप पर, लिंक्डइन पर, इंस्टा पर, फेसबुक पर, यूट्यूब पर, स्पोटीफाई पर , ट्विटर / एक्स और ब्लू स्काई पर.

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