भारत में फेक न्यूज़ कोई हादसा नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित प्रक्रिया बन चुकी है. हर बड़े राजनीतिक या सामाजिक घटनाक्रम के साथ एक तय नैरेटिव गढ़ा जाता है—चाहे वह चुनाव हों, दंगे हों, युद्ध हो या विरोध प्रदर्शन.
हरकारा डीप डाइव के इस एपिसोड में, Alt News के सह-संस्थापक प्रतीक सिन्हा बताते हैं कि 2025 में भारत में मिसइन्फ़ॉर्मेशन का पैमाना क्या रहा, इसके सबसे बड़े स्रोत कौन रहे और यह झूठ किस तरह समाज को ध्रुवीकृत करता है. रिपोर्ट के मुताबिक, फैलाई गई 61% भ्रामक जानकारियाँ सीधे सत्तारूढ़ दल को लाभ पहुँचाती हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय को लगातार निशाने पर रखा जाता है.
बात सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं है. मेनस्ट्रीम मीडिया, राजनीतिक आईटी सेल, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म और अब AI-जनरेटेड कंटेंट—सब मिलकर एक ऐसा सूचना तंत्र बना रहे हैं जहाँ सच सबसे बड़ा नुकसान उठाता है.
यह बातचीत केवल फेक न्यूज़ पर नहीं, बल्कि उस लोकतांत्रिक संकट पर है जहाँ नफ़रत सामान्य हो रही है, हिंसा रोज़मर्रा की घटना बनती जा रही है और सवाल पूछना जोखिम भरा होता जा रहा है.
अपील :
आज के लिए इतना ही. हमें बताइये अपनी प्रतिक्रिया, सुझाव, टिप्पणी. मिलेंगे हरकारा के अगले अंक के साथ. हरकारा सब्सटैक पर तो है ही, आप यहाँ भी पा सकते हैं ‘हरकारा’...शोर कम, रोशनी ज्यादा. व्हाट्सएप पर, लिंक्डइन पर, इंस्टा पर, फेसबुक पर, यूट्यूब पर, स्पोटीफाई पर , ट्विटर / एक्स और ब्लू स्काई पर.











