केंद्रीय मंत्री के बेटे पर पॉक्सो केस और रसूख की ढाल | दीप्ति सिरला #harkara
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस लाइव इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी और हैदराबाद की सामाजिक कार्यकर्ता दीप्ति सिरला ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार के बेटे के खिलाफ दर्ज पॉक्सो मामले और उसके बाद पैदा हुए कूटनीतिक व राजनीतिक हालातों पर विस्तार से चर्चा की. बातचीत की शुरुआत इस सवाल से होती है कि आखिर क्यों आठ दिन बीत जाने के बाद भी एक संगीन जुर्म के आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जबकि वह मंत्री का बेटा है. दीप्ति सिरला ने बताया कि यह मामला केवल एक एफआईआर का नहीं है, बल्कि पिछले कई महीनों से चल रहे उत्पीड़न का नतीजा है. उनके अनुसार, दिसंबर के अंत में हुई एक गंभीर घटना के बाद जब पीड़िता के परिवार ने पुलिस से गुहार लगाई, तो पुलिस ने आरोपी को बचाने के लिए उन्हें दिन भर बिठाए रखा और उल्टा आरोपी पक्ष को जानकारी दे दी. उन्होंने कहा कि पुलिस की इसी ढिलाई का फायदा उठाकर आरोपी पक्ष ने पीड़िता पर 'हनी ट्रैप' और उगाही का काउंटर केस दर्ज करा दिया, जो सत्ता के रसूख का सीधा दुरुपयोग है. बातचीत में निधीश त्यागी ने इस बात पर गहरा सवाल उठाया कि जब हैदराबाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कार्यक्रम चल रहा था, तब एफआईआर के बावजूद बंदी संजय कुमार मंच पर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ ठहाके लगाते नजर आए. उन्होंने इसे सिस्टम की संवेदनशीलता की हार बताया. दीप्ति सिरला ने रेखांकित किया कि तेलंगाना के डीजीपी का यह तर्क देना कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा में व्यस्त होने के कारण गिरफ्तारी नहीं हो सकी, पूरी तरह से हास्यास्पद है, क्योंकि संबंधित पुलिस स्टेशन प्रधानमंत्री के रूट में भी नहीं था. इंटरव्यू में स्थानीय मीडिया के रवैये की भी कड़ी आलोचना की गई. दीप्ति सिरला ने कहा कि मुख्यधारा का मीडिया और यहाँ तक कि कुछ महिला पत्रकार भी आरोपी का बचाव करने के लिए पीड़िता का चरित्र हनन कर रही हैं. उन्होंने कहा कि मीडिया में जानबूझकर ऐसे नैरेटिव चलाए जा रहे हैं जिससे पीड़िता की लाइफस्टाइल पर सवाल उठे और आरोपी को 'स्पॉटलेस' दिखाया जा सके. उन्होंने इसे 'प्रेस्टिट्यूशन' का चरम बताया, जहाँ न्याय के बजाय रसूख की पैरवी की जा रही है. बंदी संजय कुमार की भूमिका पर चर्चा करते हुए बताया गया कि उन्होंने इस कानूनी मामले को 'लंका दहन' और 'राजनीतिक षड्यंत्र' से जोड़कर एक धार्मिक और राजनीतिक मोड़ देने की कोशिश की है. दीप्ति सिरला के अनुसार, आरोपी भगीरथ पुलिस की पकड़ से बाहर होने का दावा कर रहा है लेकिन वह लगातार मीडिया और रिपोर्टर्स के संपर्क में है, जो पुलिस की मिलीभगत की ओर इशारा करता है. इंटरव्यू के अंत में दक्षिण भारत में पनप रही 'खाप पंचायत' वाली मानसिकता पर भी चिंता जताई गई. दीप्ति सिरला ने खुलासा किया कि कुछ लोग इस मामले को दबाने के लिए आरोपी और पीड़िता की शादी कराने तक का सुझाव दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह एक खतरनाक ट्रेंड है जहाँ पॉक्सो जैसे गंभीर अपराध को सामाजिक समझौते की आड़ में छिपाने की कोशिश की जा रही है, और इसमें सत्ता, पुलिस और विपक्ष का ढुलमुल रवैया समान रूप से जिम्मेदार है.

