बंगाल चुनाव: लोक बनाम तंत्र की जंग और अमित शाह की प्रतिष्ठा | श्रवण गर्ग #harkara
हरकारा डीप डाइव के इस ऑडियो इंटरव्यू मेंमें आज हमने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना और उससे जुड़ी उन जमीनी हकीकतों पर बात की, जो नतीजों का रुख बदल सकती हैं. कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने इस चुनाव को 'अमित शाह बनाम ममता बनर्जी' के व्यक्तिगत और रणनीतिक मुकाबले के रूप में विश्लेषित किया. चर्चा के दौरान मतगणना के रुझानों और बंगाल से आ रही खबरों के मुताबिक ममता बनर्जी का पलड़ा भारी नजर आ रहा है. इसके पीछे मुख्य कारण चुनाव का 'लोक बनाम तंत्र' की लड़ाई में तब्दील होना बताया गया. एक तरफ जहाँ भाजपा ने केंद्रीय बलों, प्रशासनिक मशीनरी और मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने जैसे 'तंत्र' का सहारा लिया, वहीं दूसरी तरफ बंगाल की जनता, विशेषकर महिलाएँ, ममता बनर्जी के पक्ष में एकजुट होती दिखीं. चर्चा में यह भी सामने आया कि लगभग 90 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए, जिनमें से बड़ी संख्या गैर-मुस्लिम मतदाताओं की भी थी, जिनकी नाराजगी भाजपा के लिए भारी पड़ सकती है. वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने रेखांकित किया कि भाजपा की आक्रामक रणनीति और अमित शाह के 'ए दीदी' जैसे संबोधनों ने बंगाल के गौरव और महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुँचाई, जिसका नतीजा ममता के पक्ष में ध्रुवीकरण के रूप में निकला. उनके अनुसार, भाजपा ने यदि स्वाभाविक तरीके से चुनाव लड़ा होता, तो सत्ता विरोधी लहर का लाभ उन्हें मिल सकता था, लेकिन 'बुलडोजर' वाली कार्यशैली और बाहरी नेताओं (जैसे शुभेंदु अधिकारी) को पुराने कार्यकर्ताओं पर तरजीह देने से पार्टी के भीतर और बाहर गहरा असंतोष पैदा हुआ. यहाँ तक कि आरएसएस की वह सक्रियता भी इस बार नजर नहीं आई, जो अन्य राज्यों में देखी जाती रही है. इस बातचीत का निष्कर्ष यह है कि बंगाल का यह चुनाव परिणाम न केवल राज्य की सत्ता तय करेगा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री मोदी के करिश्मे और अमित शाह की 'चुनावी चाणक्य' वाली छवि की भी परीक्षा लेगा.यदि ममता बनर्जी भारी बहुमत से जीतती हैं, तो यह विपक्षी एकजुटता के एक नए दौर की शुरुआत होगी और भारतीय जनता पार्टी के भीतर एक बड़े मंथन को जन्म दे सकती है.

