"मीम से सियासत तक: भारतीय कॉकरोच पार्टी का सच | उर्विश कोठारी #harkara
‘हरकारा डीप डाइव’ के इस इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी ने गुजरात के वरिष्ठ पत्रकार और व्यंग्यकार उर्वेश कोठारी से हाल के दिनों में चर्चा में आई “कॉकरोच पार्टी” या “कॉकरोच जनता पार्टी” को लेकर बातचीत की. चर्चा का केंद्र यह था कि क्या यह केवल सोशल मीडिया का मजाक है, या फिर भारतीय समाज में बढ़ते असंतोष का नया राजनीतिक संकेत. निधीश त्यागी ने कहा कि कुछ ही दिनों में यह अभियान पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया. छोटे शहरों, दुकानों और आम लोगों के बीच भी इसकी चर्चा होने लगी. इस पर उर्वेश कोठारी ने कहा कि अभी इस पूरे घटनाक्रम पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन इतना साफ है कि लंबे समय से जमा असंतोष को अचानक एक अभिव्यक्ति मिल गई है. उन्होंने कहा कि लोगों में बेरोजगारी, महंगाई, परीक्षा घोटालों और संस्थाओं को लेकर गहरा गुस्सा और असहायता है. सोशल मीडिया पर लाखों लोगों का अचानक जुड़ जाना दिखाता है कि समाज के भीतर बेचैनी बहुत ज्यादा है. उनके अनुसार मुख्य न्यायाधीश की “कॉकरोच” वाली टिप्पणी इस पूरे डिजिटल उभार का ट्रिगर बनी. उर्वेश कोठारी ने कहा कि आज लोगों को सिर्फ राजनेता ही नहीं, बल्कि चुनाव आयोग, न्यायपालिका और मीडिया जैसी संस्थाएं भी सवालों के घेरे में दिखाई देने लगी हैं. उन्होंने मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए और कहा कि मीडिया का बड़ा हिस्सा अब सत्ता के पक्ष में खड़ा नजर आता है. बातचीत में यह सवाल भी उठा कि क्या “कॉकरोच पार्टी” किसी बड़े राजनीतिक आंदोलन में बदल सकती है. इस पर उर्वेश कोठारी ने कहा कि फिलहाल यह बहुत कच्चा और असंगठित प्रयोग है. उन्होंने जेपी आंदोलन, नवनिर्माण आंदोलन और इंडिया अगेंस्ट करप्शन का जिक्र करते हुए कहा कि उन आंदोलनों के पीछे वर्षों का सामाजिक और राजनीतिक काम था, जबकि यहां अचानक डिजिटल उफान दिखाई दिया है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की प्रतिक्रिया दिखाती है कि सत्ता इस तरह की छोटी डिजिटल चुनौती से भी असुरक्षित महसूस कर रही है. सोशल मीडिया अकाउंट्स को बैन करना और विदेशी साजिशों की बातें करना उसी डर का संकेत है. व्यंग्य और मीम संस्कृति पर बात करते हुए उर्वेश कोठारी ने कहा कि इतिहास में हास्य और व्यंग्य हमेशा सत्ता को चुनौती देने का माध्यम रहे हैं. लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि केवल वायरल मीम्स से राजनीतिक बदलाव नहीं आता. उनके अनुसार अगर यह अभियान आगे बढ़ना चाहता है तो उसे शिक्षा, नीट, सीबीएसई, बेरोजगारी और नागरिक मुद्दों पर लगातार काम करना होगा. उन्होंने कहा कि “कॉकरोच पार्टी” को केवल ऑनलाइन लोकप्रियता तक सीमित नहीं रहना चाहिए. असली चुनौती यह है कि क्या यह ऊर्जा जमीन पर किसी संगठित नागरिक आंदोलन में बदल सकती है. बातचीत के अंत में उर्वेश कोठारी ने कहा कि “यह मीम से शुरू हुआ है, लेकिन मीम पर खत्म नहीं होना चाहिए.” वहीं निधीश त्यागी ने कहा कि लोगों की प्रतिक्रिया यह दिखाती है कि समाज के भीतर नई राजनीतिक अभिव्यक्ति की भूख मौजूद है और अब देखना यह है कि यह प्रयोग आगे किस दिशा में जाता है.

