राम मंदिर ट्रस्ट का चढ़ावा विवाद: आस्था की चोट, सत्ता का सवाल
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावे और चंदे को लेकर उठा विवाद अब सिर्फ प्रशासनिक मसला नहीं रह गया है, बल्कि बीजेपी और आरएसएस के राजनीतिक भविष्य से सीधे जुड़ गया है. वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग ने हरकारा डीपड्राइव में नितीश त्यागी से बातचीत में कहा कि इस पूरे प्रकरण ने करोड़ों उन श्रद्धालुओं को गहरी चोट पहुंचाई है, जिन्होंने दशकों तक आस्था के नाम पर अपना सब कुछ दांव पर लगाया था.
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा ने कथित तौर पर इस्तीफा दे दिया है, लेकिन इस्तीफे की न तो कोई लिखित प्रति सार्वजनिक हुई है, न ही इसकी घोषणा करने वाले कोषाध्यक्ष का इससे कोई सीधा वास्ता सामने आया है. इन इस्तीफों पर 11 जुलाई को विचार होना है, जिसे श्रवण गर्ग "अदालती तारीख की तरह टलती जाने वाली प्रक्रिया" बताते हैं.
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच में अब तक नौ लोगों पर एफआईआर और आठ गिरफ्तारियां हुई हैं, जबकि छापों में बरामद राशि महज 80 लाख रुपए के आसपास बताई जा रही है, जो कथित 2000 करोड़ रुपए के घोटाले के दावों के सामने बेहद छोटी है. श्रवण गर्ग का कहना है कि जांच की गति और दायरा दोनों ही यह संकेत देते हैं कि केंद्र और राज्य सरकारें इस मामले को "डाइल्यूट" करने में पूरी ताकत झोंक रही हैं.
चर्चा का केंद्रीय सवाल यह था कि क्या इस विवाद का असर 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा, गुजरात और मणिपुर के विधानसभा चुनावों पर पड़ेगा. श्रवण गर्ग के अनुसार, जनमानस पर असर तो पहले ही हो चुका है, लेकिन इसे राजनीतिक हार-जीत में बदलना विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती है. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बसपा और राष्ट्रीय लोक दल सहित तमाम दलों के बीच एकजुटता का अभाव इस मुद्दे को कमजोर कर सकता है. वहीं कांग्रेस नेता अजय राय और सपा नेता धर्मेंद्र यादव सहित कई विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने की घटनाएं भी सामने आई हैं.
श्रवण गर्ग ने इस पूरे प्रकरण को आरएसएस की छवि के लिए भी बड़ा झटका बताया, यह कहते हुए कि चंपत राय जैसे संघ प्रचारक रहे व्यक्ति पर लगे आरोप संघ और बीजेपी के बीच पहले से मौजूद खींचतान को और उजागर करते हैं. उन्होंने इसे 1975 के आपातकाल से तुलना करते हुए "धार्मिक आपातकाल" की संज्ञा दी, जिसमें आम श्रद्धालुओं की आस्था और बचत, दोनों पर आघात हुआ है.
बातचीत के अंत में श्रवण गर्ग ने आगाह किया कि अगर विपक्ष इस अवसर को भुनाने में नाकाम रहता है, तो यह मुद्दा भी समय के साथ शांत पड़ जाएगा और आरोपित लोग बिना किसी नतीजे के पुनर्वासित हो सकते हैं. उनके शब्दों में, "यह सिर्फ सूचना का मामला नहीं, बल्कि जनचेतना का मामला है."

