बुलडोज़र वापस आ गया — सरकार डरी तो है, पर बदली नहीं #harkara
20 जुलाई 2026 को जंतर मंतर से संसद की तरफ़ बढ़ रहे छात्रों पर लाठी, आँसू गैस और — रिकॉर्ड के मुताबिक़ — पेलेट चले. उसके बाद सरकार पीछे हटती दिखी. शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा हुआ, गिरफ़्तार नाबालिग़ छोड़े गए, राज्यों ने कार्रवाई रोकी. ग़लती सरकार की थी, पर माफ़ मोदी जी ने किया. मोहन भागवत वात्सल्य रस से ओत प्रोत नज़र आये. हालांकि सरकार के मंत्री और आरएसएस के दूसरे पदाधिकारी नौजवान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जहर उगलते रहे. ये बताने से बचने के लिए कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन्स, छात्राओं से बदसलूकी, एके -47, बल प्रयोग किसके कहने पर हुए थे, देश के गृहमंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद के मानसून सत्र के दौरान सदन मे आने से बचते रहे. फिर सरकार वापस लौट आई. एफ़आईआर बनी रहीं, घरों पर दस्तक हुई, इंस्टाग्राम से पोस्ट ग़ायब होने लगीं, और रामपुर में बुलडोज़र फिर से खड़ा हो गया. 15 अगस्त को लाल किले से 77 मिनट का भाषण हुआ. उसमें युवा शक्ति थी, एआई ट्रेनिंग थी, 2047 था. 20 जुलाई नहीं था. इस एपिसोड में हम पाँच बातें रखते हैं — और आख़िर में उन्हें दोहराते हैं ताकि वे याद रहें.

